संतोष कुमार की रिपोर्ट
जमशेदपुर/सरायकेला : कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) और भारत सरकार ने कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं. भले ही महानगरों और बड़े शहरों में लोग अपने स्तर से जागरूक हैं, और इस जानलेवा घातक संक्रमण से बचने के लिए जरूरी एहतियाती कदम उठा रहे हैं, लेकिन सरायकेला- खरसावां जिला के आदित्यपुर शहरी स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी फरमान की किस तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही है आइए इसका नजारा आपको हम दिखाते हैं. यह है आदित्यपुर शहरी स्वास्थ्य केंद्र, हमने अपनी पड़ताल में जो पाया उससे ऐसा कहीं से भी नहीं लग रहा है कि सरायकेला- खरसावां जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस खतरनाक संक्रमण को लेकर जागरूक है.

भले ही सरकारी विज्ञापनों और होर्डिंग में इसके नाम पर लाखों रुपए उड़ाए जा रहे हैं, लेकिन ग्राउंड जीरो की जो हकीकत है वह बेहद ही चौंकाने वाली है. इस अस्पताल के कर्मचारियों को यह भी नहीं पता कि सेनीटाइजर का प्रयोग कब किया जाना है. यहां के सभी कर्मचारी भले ही मास्क लगाकर मरीजों की देखभाल कर रहे हैं, लेकिन मरीजों से संक्रमण फैलने के लिए जरूरी एहतियात यहां नहीं बरती जा रही है. किसी भी कर्मचारी के टेबल पर सैनिटाइजर का प्रयोग नहीं किया जा रहा है. ऐसे में आप समझ सकते हैं कि इस खतरनाक बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी दिशानिर्देश का पालन अस्पताल में नहीं किया जा रहा है. वैसे जब इस बाबत यहां के कर्मचारियों से पूछा गया तो उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि ऐसा कोई भी फंड विभाग की ओर से आवंटित नहीं किया गया है, जिससे वे सैनिटाइजर का प्रयोग खुद भी कर सके और यहां पहुंचने वाले मरीजों को भी कराएं. तो आप समझ सकते हैं झारखंड में खासकर सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में इस खतरनाक बीमारी से लड़ने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं.
अब देखिये आदित्यपुर का बिजली विभाग का हाल
भले ही कोरोनावायरस को लेकर पूरी दुनिया त्रस्त है, भले ही देश में इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया गया है. भले ही सरकार ने 14 अप्रैल तक राज्य भर के सभी सरकारी और गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों को बंद करने का फरमान जारी कर दिया है. भले ही पब्लिक प्लेस के लिए जरूरी एहतियात बरतने के नियम बना दिए गए हैं, लेकिन झारखंड के सरायकेला- खरसावां जिला के आदित्यपुर स्थित सहायक विद्युत अभियंता, विद्युत आपूर्ति अवर प्रमंडल कार्यालय में कोरोना को लेकर कोई गंभीरता नहीं बरती जा रही है. ना ही सैनिटाइजर का प्रयोग किया जा रहा है, और ना ही लोगों से इसे प्रयोग में लाने की अपील की जा रही है. आलम यह है कि यहां के कर्मचारियों को ये भी नहीं पता कि सैनिटाइजर होता क्या है. हमारी पड़ताल के बाद कुछ जागरूक उपभोक्ता नजर आए, उन्होंने अपने जेब में रखे सैनिटाइजर से खुद भी हाथ धोया और यहां के कर्मचारियों को भी हाथ साफ करवाया. वैसे आपको और आश्चर्य तब होगा जब यहां के कार्यपालक अभियंता से हमने इस खतरनाक वायरस को लेकर दिए गए सरकारी गाइडलाइन के संबंध में जानने का प्रयास किया. उन्होंने साफ तौर पर कहा विभाग की ओर से ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे आज से ही अपने स्तर से इसकी व्यवस्था करेंगे. बहरहाल वैश्विक आपदा घोषित कोरोना वायरस का खौफ भले पूरे विश्व में है, लेकिन आदित्यपुर के इस सरकारी विभाग में नहीं.















