
जमशेदपुर : जमशेदपुर में बाजारों में लॉकडाउन का मजाक उड़ रहा है. लोग खुद से अपनी जान को खतरे में डाल रहे है. लोग यह समझ नहीं रहे है कि यह कोई पुलिस या प्रशसान की दबिश की जरूरत नहीं है बल्कि यह खुद से अपने आपको बचाने की जरूरत है.
इसके लिए सबको एक साथ मिलकर कड़ी मेहनत करने की जरूरत है ताकि इस बीमारी से लड़ाई लड़ा जा सके. लेकिन लोग इसको पुलिस या प्रशासन के दबाव का इंतजार कर रहे है. लोगों को कहा जा रहा है कि सामाजिक दूरियां यानी एक दूसरे से करीब एक मीटर की दूरियों को भी बनाकर रखे, लेकिन जमशेदपुर के बाजारों में लोग ऐसे उमड़ रहे है, मानो सब्जियां या कोई खाने का चीज मिल ही नहीं रहा हो. सबकुछ सामान्य तरीके से मिल रहा है, लेकिन लोग अपनी सहूलियतों के मुताबिक, शाम होते ही बाजारों में उमड़ पड़ रहे है. बागबेड़ा चौक का यह नजारा देखकर आपको और लॉकडाउन लगाने वालों को शर्म आ जायेगी कि आखिर यह लॉकडाउन लगा ही क्यों है और लगा है तो लोग खुद से क्यों नहीं मान रहे है, लोग नहीं मान रहे है तो पुलिस और प्रशासन इसको सख्ती से क्यों नहीं निबट रही है.
बागबेड़ा थाना से कुछ ही दूरी पर स्थित चौक से लेकर बाजारों में इतनी भीड़ मानो कोई लॉकडाउन है ही नहीं. लोग इधर-उधर बेवजह का घुम रहे है. चौक पर सब्जियां लोग एक पर एक चढ़कर खरीद रहे है, सटे हुए लोग आसानी से देखे जा सकते है. पुरुष क्या, महिलाएं क्या, बुजुर्ग क्या, युवा क्या, हर कोई इस भीड़ में शामिल है. हालात बदतर दिखते है जब बागबेड़ा बाजार में यह भी देखा जाता है कि वहां चाय-पकौड़ी से लेकर आलू चॉप और सिंघाड़ा जैसे दुकानें भी खोल दी गयी है. प्रशासन आपके घर तक सब्जी से लेकर राशन तक पहुंचाने को तैयार है, खाने के लिए थानों में सेंटर खोल दिये गये है, लेकिन फिर भी लोग सचेत नहीं होंगे तो फिर तो सख्ती जरूरी है, जिसके लिए प्रशासन को हमेशा तैयार रहना होगा क्योंकि देश बचाने के लिए पुलिस और प्रशासन को ऐसे कदम उठाने ही पड़ते है. वैसे सब्जी बाजारों को एक जगह से दूसरी जगह खुले में हटाया गया है, लेकिन बागबेड़ा बाजार में ऐसी कार्रवाई नहीं की गयी है, जिसकी वजह से यह हालात है जबकि बगल में ही कई मैदान है, जहां खुले में दुकानें लगायी जा सकती है.







