
जमशेदपुर : कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन तीन मई तक लागू है लेकिन इस बीच सोमवार से कुछ इलाको में छूट भी दिया गया है. हालाँकि जमशेदपुर में कुछ खास फर्क नही पड़ा है लेकिन सड़को पर गाड़ियों की भीड़ बढने लगी है. इसके साथ ही रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले दिहाड़ी मजदूर भी सड़को के किनारे छोटे छोटे फुटपाथ दुकान लगाकर बैठ गये है. ये बात अलग है कि लोगो की उतनी भीड़ नही है जिससे की उनकी बिक्री पूरी तरह से हो सके. आपको बता दे कि बाजार से थोड़े अंदर अगर आप देखे तो छोटे दुकानदार अपना व्यवसाय चलने के लिए परेशान है क्योंकि लॉकडाउन की वजह से उन्हें उनके परिवार चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आपको बता दे कि आज से सरकारी ऑफिस में भी काम शुरू हो गया है. साथ ही सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं भी जारी कर दी गयी है और कुछ प्राइवेट डॉक्टर भी मरीजो को देखना शुरू कर दिए है.

खास बात यह है कि लोगो में इस बात को लेकर जागरूकता दिख रही है कि जल्दी से कोरोना से निजात पाया जाये क्योकि इसी की वजह से लोग घरो से निकल नही रहे है. आपको बता दे कि जमशेदपुर में इनकम टैक्स ऑफिस, डीसी ऑफिस, पीएफ ऑफिस आदि भी आज से खुलने लगे है. जमशेदपुर में लॉकडाउन के दौरान प्रशासन के कड़ाई का नतीजा सडको पर पूरी तरह से देखने को मिल रहा था. लोग सडको पर निकलने से पहले सोच रहे थे. और अगर कोई बेवजह सडको पर पकड़ा जाता था तो उसे दंडित भी किया जाता था.
केंद्र सरकार के अधीन वाले सारे दफ्तरों को खोल दिया गया है. हालांकि, उपस्थखिति काफी कम ही है. केंद्रीय आयकर विभाग हो या फिर सेंट्रल एक्साइज विभाग का दफ्तर, हर जगह लोगों का आना जाना लगा हुआ था. हालांकि, लोगों की उपस्थिति कम है. लेकिन जमशेदपुर स्थित पीएफ के क्षेत्रीय कार्यालय में लोगों की भीड़ जुटी. लोग अपना पीएफ का पैसा निकालने के लिए पहुंचे तो उनको बैरंग लौटा दिया गया.

यह कहा गया कि अब उनको कोई भी पैसा लेना होगा तो 3 मई के बाद से ही मिलेगा, अभी कुछ नहीं दे सकते है. लोग गुस्से में थे, लेकिन ऑफिसर और कर्मचारी कुछ कहने को तैयार नहीं थे. उन लोगों ने साफ तौर पर दरवाजा ही बंद कर दिया. बेचारे मजदूर पैसों के लिए तड़पते रहे. पीएफ ऑफिस से यह छूट दी गयी है कि लोग अपना 75 फीसदी पैसे को निकाल सकते है, लेकिन उनको ऐसा करने सी इजाजत नहीं दी गयी.
लिहाजा, इन सारे लोगों को पैसा नहीं निकालने दिया गया. मजदूरों की रोजी रोटी छिन गयी है. उनके पास पैसे नहीं है. लोग पैसे के लिए 20 अप्रैल तक का इँतजार कर रहे थे. जब इस आस में सारे मजदूर पहुंचे कि वे लोग पैसे निकाल सकेंगे तो उनको पैसे निकालने की इजाजत नहीं दी गयी. लोग मायूस होकर लौटे. हालांकि, इस दौरान पीएफ के क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकािरयों से बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई बात करने से साफ तौर पर रोक दिया.
कई सारे दुकानों को भी खोला गया, पुलिस ने बाद में कराया बंद
20 अप्रैल से लॉकडाउन को लेकर दी गयी छूट का मायने लोगों ने अपनी तरीके से निकाला. लोगों ने कई सारी दुकानों को ही खोल दिया. चक्का, ऑटोमोबाइल समेत तमाम लोगों ने दुकानें खोल दी थी. बाद में थाना की पुलिस द्वारा पूरी सख्ती बरती गयी और लोगों को किसी तरह नियमों का उल्लंघन करने से रोक दिया गया. पुलिस को इस दौरान काफी सख्ती बरती गयी.

बैंकों में भी लगी रही भीड़
बैंकों में लोगों की काफी भीड़ बढ़ी. बैंकों के में खास तौर पर महिलाएं अपने एकाउंट में केंद्र सरकार द्वारा भेजे गये पांच सौ रुपये जबकि राज्य सरकार द्वारा भेजे जा रहे एक हजार रुपये को भी लोगों ने निकालने केलिए लंबी लाइनें लगी. बैंकों के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का लोगों ने खुद से अनुपालन तो नहीं किया, बैंकों के लोगों ने भी उसका अनुपालन कराने के लिए किसी तरह की कोई मशक्कत करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया.

जानें- किसे छूट मिलेगी और कहां जारी रहेगा प्रतिबंध.
घरेलू उपयोग में इन पर रहेगी छूट
-किराना और राशन की दुकानें.
-फल-सब्जी के ठेले, साफ-सफाई का सामान बेचने वाली दुकानें.
-डेयरी और मिल्क बूथ, पोल्ट्री, मीट, मछली और चारा बेचने वाली दुकानें.
-इलेक्ट्रीशियन, आईटी रिपेयर्स, प्लंबर, मोटर मैकेनिक, कारपेंटर, कुरियर, डीटीएच और केबल सर्विसेस.
-ई-कॉमर्स कंपनियां काम शुरू कर सकेंगी. डिलीवरी के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों के लिए जरूरी मंजूरी लेनी होगी.
-जिला प्रशासन की यह जिम्मेदारी होगी कि वो सभी जरूरी सेवाओं की होम डिलिवरी का इंतजाम करे. ऐसा होने पर ज्यादा लोग बाहर नहीं निकलेंगे. दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूरी होगा.
आईटी और इससे जुड़ी सेवाओं वाले दफ्तर. इनमें 50फीसद से ज्यादा स्टाफ नहीं होगा.
केवल सरकारी गतिविधियों के लिए काम करने वाले डेटा और कॉल सेंटर.
ऑफिस और आवासीय परिसरों की प्राइवेट सिक्योरिटी और मैंटेनेंस सर्विसेस.
ट्रक रिपेयर के लिए हाईवे पर दुकानें और ढाबे खुलेंगे. राज्य सरकारें की जिम्मेदारी होगी कि यहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो.
गांवों और खेती-किसानी से जुड़ी ये सेवाएं और उद्योग शुरू हो सकेंगे
-नगरीय निकाय की सीमा से बाहर गांवों में उद्योग शुरू किए जा सकेंगे.
-गांवों में ईंट भट्टों और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में काम शुरू किया जाएगा.
-ग्राम पंचायत स्तर पर सरकार की मंजूरी वाले कॉमन सर्विस सेंटर खुल सकेंगे.
-कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस सर्विस शुरू होगी.
-फिशिंग ऑपरेशन (समुद्र और देश के अंदर) जारी रहेंगे. इसमें- मछलियों का भोजन, मेंटेनेंस, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और बिक्री हो सकेगी.
-हैचरी और कमर्शियल एक्वेरियम भी खुल सकेंगे. मछली और मत्स्य उत्पाद, फिश सीड, मछलियों का खाना और इस काम में लगे लोग आवाजाही कर सकेंगे.
-चाय, कॉफी, रबर और काजू की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और बिक्री के लिए फिलहाल 50 फीसद मजदूर ही रहेंगे.
-दूध का कलेक्शन, प्रोसेसिंग, डिस्ट्रिब्यूशन और ट्रांसपोर्टेशन हो सकेगा.
-पोल्ट्री फॉर्म समेत अन्य पशुपालन गतिविधियां चालू रहेंगी.
-पशुओं का खाना मसलन मक्का और सोया की मैन्युफेक्चरिंग और डिस्ट्रिब्यूशन हो सकेगा. पशु शेल्टर और गौशालाएं खुलेंगी.
-जरूरी सामान की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में काम होगा. इनमें ड्रग, फार्मा और मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं.
-सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाकर मनरेगा कामगार काम कर सकेंगे.
-ऐसी प्रोडक्शन यूनिट, जिसमें प्रोसेस को रोका नहीं जा सकता. वे शुरू हो सकेंगी. उनकी सप्लाई चेन भी शुरू हो सकेगी.
-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और स्पेशल इकोनॉमिक जोन, इंडस्ट्रियल टाउनशिप में स्थित कंपनियों को अपने यहां काम करने वाले स्टाफ के रुकने की व्यवस्था कंपनी परिसर में करनी होगी. अगर स्टाफ बाहर से आ रहा है तो सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए उनके आने-जाने के इंतजाम करने होंगे.
-आईटी हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियों में कामकाज होगा. कोल, माइन और मिनरल प्रोडक्शन, उनके ट्रांसपोर्ट और माइनिंग के लिए जरूरी विस्फोटक की आपूर्ति जारी रहेगी.
-ऑयल और जूट इंडस्ट्री, पैकेजिंग मटेरियल की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को भी छूट मिलेगी.
-शहरी क्षेत्र के बाहर सड़क, सिंचाई, बिल्डिंग, अक्षय ऊर्जा और सभी तरह के इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट में कंस्ट्रक्शन शुरू हो सकेगा. अगर शहरी क्षेत्र में कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट शुरू करना है तो इसके लिए मजदूर साइट पर ही उपलब्ध होने चाहिए. कोई मजदूर बाहर से नहीं लाया जाएगा.







