
रांची : झारखंड में कोरोना वायरस (कोविड-19) के मरीज बढ़ते नजर आ रहे है. कोरोना वायरस को देखते हुए लगातार कदम उठाये जा रहे है. इस कड़ी में कोरोना वायरस का इलाज भी चल रहा है. इसके तहत मंगलवार को स्वास्थ्य सचिव डॉ नीतिन मदन कुलकर्णी और आपदा प्रबंधन सचिव डॉ अमिताभ कौशल ने संयुक्त रुप से संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. डॉ नीतिन मदन कुलकर्णी ने बताया कि राज्य में सामान्य मरीजों के लिए कोरोना वायरस के इलाज के लिए 2148 बेड है जबकि कोरोना के गंभीर मरीज का 1521 बेड आइसीयू युक्त रखा गया है. आइसोलेशन और कोरोना वायरस के मरीजों के लिए आरक्षित की गयी है. इसके अलावा राज्य में 190 वेंटिलेटर अभी है. इसकी संख्या को बढ़ाया जाना है. डॉ नीतिन मदन कुलकर्णी ने बताया कि अभी 340 वेंटिलेटर तैयार हो रहे है. चूंकि, इसको लेकर पहले से कोई तैयारी नहीं थी, इस कारण इसमें देर हो रही है, लेकिन इसको जल्द स्थापित कर दिया जायेगा. उन्होंने बताया कि अब तक 5508 कोरोना वायरस के सैंपल की जांच हो चुकी है जबकि 4255 मरीज नेगेटिव है जबकि 45 पोजिटिव केस सामने आये है. उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस को लेकर जरूरी मास्क समेत तमाम उपकरण राज्य सरकार के पास पर्याप्त है और जिलों को उपलब्ध करा दिया गया है. उन्होंने बताया कि अभी 25 मरीज रांची के रिम्स में भरती है, जिनका स्वास्थ्य स्थिर है. इसमें से तीन पेशेंट डाइबिटीज से पीड़ित है. मंगलवार को एक मरीज की मौत हो चुकी है, जिसका टेस्ट चल रहा था. उन्होंने बताया कि जो मरीज की मौत मंगलवार को हुई थी, उनका पहले टेस्ट नेगेटिव आया था. कोरोना वायरस के कारण उनकी मौत नहीं हुई थी. उनका कोरोना वायरस के टेस्ट का फाइनल रिपोर्ट आना बाकि है. उन्होंने बताया कि झारखंड में लगातार टेस्ट हो रहा है. एक दिन में 700 टेस्ट करने की क्षमता झारखंड में है. पहला कोरोना वायरस का टेस्ट 14 अप्रैल को जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में शुरू किया गया था जबकि बाद में 24 अप्रैल को रांची के रिम्स में चेकअप शुरू हुआ जबकि आठ अप्रैल से धनबाद के पीएमसीएच में इसकी जांच शुरू हो गया. इसके अलावा इटकी के आरग्यशाला में भी जांच हो रही है. अभी तक रांची के रिम्स अस्पताल में 220 के आसपास जांच हो रही है. सभी सेंटरों में क्षमता है, लेकिन चूंकि तकनीकी जांच होती है, इस कारण इसमें देर होती है. सभी पहलुओं को देखने के बाद ही किसी तरह की कोई रिपोर्ट दी जाती है. एंटी बॉडी टेस्ट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अभी इसका टेस्ट शुरू किया गया था, लेकिन आइसीएमआर की ओर से किट जो भेजा गया है, उसका टेस्टिंग रोक दिया गया है. उसकी रिपोर्ट को लेकर संशय उत्पन्न होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है. इस कारण एंटी बॉडी टेस्ट को रोक दिया गया है.
झारखंड बाजार एप को किया गया लांच
कोरोना खतरे के बीच झारखण्ड सरकार हर संभव प्रयास कर रही है जिस से लोगो को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले, विभाग द्वारा आज रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के द्वितीय तल में झारखंड एंड बाजार ऐप की लॉन्चिंग की गई. सरकार का कहना है कि इस एप से लोगों को बड़ी सहायता मिलेगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि लॉक डाउन को ध्यान में रखते हुए जनता की सुरक्षा के लिए इस एप्प की शुरुआत की गयी है. उन्होंने कहा कि बाजार मोबाइल एप का उद्देश्य लॉकडाउन की अवधि में ग्राहकों को जियो लोकेशन के आधार पर आसपास के दुकानों की उपलब्धता के बारे में जानकारी देना है. ये वैसे दुकान होंगे, जो आपके आसपास के क्षेत्र में राशन, फल, सब्जी, दूध और दवाईयों का कारोबार करते हैं. इस एप्प के माध्यम से लोगो तक घर घर तक घरेलू सामानों को पहुचाया जायेगा. ताकि लोग अपने घरो से बाहर ना निकले. हालाँकि हेमंत सोरेन ने बार बार लोगो से अपील किया है कि अगर लोग लॉक डाउन के नियमो को नही मानेंगे तो छुट वापस लिया जा सकता है. इसलिए सोशल डीस्टेंसिंग का खास ख्याल रखे और सुरक्षित रहे.

झारखंड के प्रवासी मजदूरों को नही मिल रही सहायता एप्प से मदद, भाजपा ने लगाया संवेदनहीनता का आरोप
जमशेदपुर : देशव्यापी लॉकडाउन के बीच फंसे झारखंड प्रदेश के प्रवासी श्रमिकों व विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता मुहैया कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा लांच किए गए सहायता मोबाइल एप्प पर कोई मदद नही मिल रही है. एप्प के लांच होने के साथ ही लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. मंगलवार को भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष दिनेश कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए सरकार की संवेदनहीनता का आरोप लगाया। महानगर अध्यक्ष ने एप्प को बेहद जटिल बताते हुए इसके उपयोग में आ रही समस्याओं को बिंदुवार सामने रखा व कुछ मांगे सरकार के समक्ष रखी है. महानगर अध्यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि लॉक डाउन हुए करीब करीब 30 दिन हो गए है. इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों ने दूसरे राज्यों में फंसे अपने मज़दूरों का एवं विद्यार्थियों की सुध लेकर उनतक सहायता पहुँचा रही है. वहीं, दूसरी ओर झारखंड सरकार के पास नीति और नियत का स्पष्ट आभाव दिख रहा है. वो इस संकट काल में भी आरोप प्रत्यारोप की राजनीति से बाज नही आ रही है. दूसरे राज्यों में फॅसे करीब 8 लाख मज़दूरों के लिए सिर्फ और सिर्फ कागज़ पर खोखली योजना एवं उस हवा-हवाई योजनाओं का बड़े विज्ञापन पर ही कार्य किया जा रहा है. लगातार मजदूरों के फ़ोन और सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोग संपर्क कर रहे है उन सबको यथा सम्भव मदद करने का प्रयास किया जा रहा है, ये संवेदनहीन सरकार ने उनकी संवेदनाओं का माखौल उड़ाकर उनके लिए बनी तमाम योजनाओं को सिर्फ अफसरशाही के भेंट छोड़ दिया है. हेल्पलाइन नम्बर हो, 181 हो या अब 5 दिन पूर्व लांच हुई सहायता एप्प हो, सभी प्रयास सिर्फ कागज़ पर ही दिख रहे है. पड़ोस के राज्य अपने मज़दूरों तक निरंतर सहायता पहुँचा रही है परंतु हमारी सरकार अभी भी लालफ़ीताशाही के भरोसे बैठी हुई है. उन्होंने उपरोक्त समस्याओं पर उचित संज्ञान लेते हुए प्रवासी मजदूरों के जल्द बेहतर मदद की माँग की है.
भाजपा के अनुसार सहायता एप्प पर कुछ तकनीकी खामियाँ निम्न है –
- गृह जिले के नाम को चयनित करने के बाद गृह प्रखंड के नाम आने में जीपीएस की समस्या.
- पेज 1 पर सत्यापित करने के स्थान पर जीपीएस की समस्या आना.
- मोबाइल नंबर सत्यापन पर OTP का काफी विलंब से आना या नही भी आना.
- आधार कार्ड का फोटो लेने पर “चेहरा नही डिटेक्ट हुआ …पुनः प्रयास करे” जैसे एरर दिखाना.
- आधार की फ़ोटो लिए जाने पर पुनः पहले पेज पर वापस भेज देना.
- फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 22.04.2020 तक है, लेकिन झारखंड सरकार के कल शाम तक के आंकड़ों के अनुसार 7.5 लाख झारखंड के मज़दूरों की संख्या के विरुद्ध सिर्फ 2200 लोगों ने रजिस्टर किया है ऐसे में रेजिस्ट्रेशन की तिथि को सुविधानुसार बढ़ायी जाए.
- इसके अतिरिक्त, हाल के दिनों में सहायता एप्प को डाऊनलोड करने में भी तकनीकी समस्या लागातर सामने आ रही है। जिससे जरूरतमंदों द्वारा एप्प डाऊनलोड भी नही हो रही है.
- जिनके पास स्मार्ट मोबाइल नही उन्हें कैसे मिलेगी मदद.
- वेबसाइट पर आने वाले सर्वर से प्राप्त एरर संदेशों को लेकर IT विशेषज्ञ लोगों का कहना है कि डेटा सुरक्षा के मद्देनजर ऐसे एरर मैसेज यूजर को नही दिखाए जाने चाहिए.
- इससे पहले भी सरकार द्वारा जारी गूगल डॉक्स वाले फैसले ने फंसे लोगों को भ्रमित किया.















