
चाईबासा : मां शक्ति रूपा महिला समिति की अध्यक्ष प्रमिला पात्रो ने कहा अवैध देसी शराब का धंधा क्षेत्र में कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है. महिला समिति सदस्यों ने अवैध दारू के विरुद्ध लंबी लड़ाई लड़ी है. नशा के विरुद्ध लड़ाई में हमें यातनाएं सहने के साथ झूठे मुकदमे का भी सामना करना पड़ा है. दारू माफियाओं की ऊंची पहुंच ने हमेशा हमारे आंदोलन को दबा दिया है. इधर पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग भी लगातार छापामारी कर रहे हैं, पर यह धंधा अपनी तेज रफ्तार से जारी है, जो इस बात का प्रमाण है कि इसकी जड़ें काफी गहरी हैं. लॉकडाउन के समय जबकि सारे धंधे ठप हैं. इस अवैध धंधे को तो मानो पंख लग गए हों. दिन दुना रात चौगुना तरक्की कर रहा है. बाकायदा दारू की भट्टी है, जहां सुबह-शाम जमघट लगी रहती है. न पीने वालों को कोरोना का खौफ है और न पिलाने वालों को. सोशल डिस्टेंसिंग का तो इन्हें ख्याल भी नहीं है. खुल्लम-खुल्ला सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. न मास्क, न सैनिटाइजर, न कोई सामाजिक दूरी बस पीयो और पिलाओ से मतलब है. प्रमिता पत्रो ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति को देख कर महिला सदस्य एक बार फिर आंदोलन के मूड में है. गांव-गांव में अभियान चलाकर उसी गांव की सदस्य भट्ठियों को समूल नष्ट करेंगी.
उन्होंने कहा कि जैंतगढ़ बाजार से सटे एक-दो घर तो बाकायदा दारू की भट्ठी बन गये हैं. जैंतगढ़ डाकबंगला के सामने के एक घर में तो सुबह-शाम शराबियों की जमघट लगी रहती है, जहाँ दिहाड़ी मजदूरी करने वाले कूली अपनी दिन भर की कमाई को झोंक देते हैं. उसी के बगल में बैठकर लोग जुआ भी खेलते हैं. दारू का व्यापारी डाकबंगला के सामने के घर में गुटुसाहि, दलपोसी, बांसकांठा से लेकर शराब बेचता है. रोजाना 4-5 भट्टे का माल अकेला बेचता है. इसके साथ, गुटुसही, बुरुसाहि, खुंटियापाड़ा, बारला, मुंडुई, गुमुरिया, बुरुसाई, खुंटियापाड़ा, बारला, मुंडुई, गुमुरिया, बासुदेवपुर, कोन्द्रकोड़ा, छानपदा, पट्टाजैंत, देवगांव, भंगांव, सिअलजोड़ा, रामोसाई अदि गांव में भी बड़े पैमाने पर अवैध महुआ चुलाई का गोरख धंधा होता है। प्रमिता पात्रो ने कहा है कि इस अवैध धंधे पर पूर्ण विराम नहीं लगा, तो आंदोलन करने के साथ ही मुख्यमंत्री से शिकायत की जायेगी.






