
सरायकेला: सरायकेला- खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड आपूर्ति विभाग में भ्रष्टाचार और कालाबाजारी चरम है. शनिवार सुबह एक बार फिर से ऐसा ही एक मामला उस वक्त प्रकाश में आया, जब नगर निगम के वार्ड 6 के पूर्व पार्षद के मकान के बगल में स्थित राधा रानी जन वितरण की प्रणाली की दुकान के समीप वाहन संख्या JH05 V- 8840 पर चावल के बोरे लादे जा रहे थे. हैरान करने वाली बात ये नजर आयी कि गाड़ी में 50 केजी के बोरे ऊपर लादे जा रहे, बीच में 25 केजी के और फिर नीचे 50 केजी के. तस्वीरों में आप साफ देख सकते हैं. वही इस संबंध में जब स्थानीय लोगों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने बताया कि यहां आए दिन इस तरह की गाड़ियां आती है, जिसमें अनाज के बोरे लादे जाते हैं, कहां जाता है, यह बताने से उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की. उन्होंने बताया कि महीने में तीन- चार बार गाड़ियां आती है और उसमें अनाज के बोरे लादे जाते हैं. वही वाहन चालक से जब पूछा गया, कि अनाज के बोरों की डिलीवरी कहां होगी, तो उसने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा, कि मालिक जहां बोलेंगे वही पर मुझे ले जाना है.

वाहन मालिक द्वारा बताया गया, कि शिवनारायणपुर जाएगा. वैसे गाड़ी सरकारी है, या निजी ये बड़ा सवाल है. वैद्य चालान मांगने पर चालक ने दिखाने से इंकार कर दिया. सवाल ये उठता है, कि अगर वैद्य रूप से अनाज का उठाव और हस्तांतरण हो रहा था, तो विभाग के अधिकारी या डीलर मौके पर मौजूद क्यों नहीं थे. अगर वैद्य वाहन से अनाज का उठाव हो रहा था, तो वाहन मालिक के पास वैद्य परमिट क्यों नहीं थे ? अगर थे, तो मीडिया के समक्ष उसने क्यों नहीं दिखाई? वैसे जिले में सरकारी अनाज के कारोबारियों का मनोबल किसके शह पर इतना बढ़ा हुआ है, ये जांच का विषय है. गौरतलब है, कि एक पखवाड़ा पूर्व आदित्यपुर दिंदली बस्ती में भी ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया था. जहां एक डीलर श्याम अग्रवाल अपनी दुकान से ब्लैक लिस्टेड व्यक्ति गया शाह से अनाज ढुलाई करवा रहा था. कैमरे की नजर पड़ते ही डीलर और संदिग्ध व्यक्ति भागते नजर आए थे, लेकिन अब तक इस मामले में विभागीय अधिकारियों ने कोई पड़ताल नहीं की. अगर आपूर्ति विभाग के पदाधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हैं तो राज खुल सकता था.
इस मामले पर भी अगर विभाग सख्ती से जांच करे तो गरीबों के अनाज का कालाबाजारी होने से बच सकता है. वैसे अबतक कार्रवाई के नाम पर ढाक के तीन पात ही साबित हुए हैं और डीलर- दलाल और बिचौलिए की मिलीभगत से जिले में बड़े पैमाने पर सरकारी अनाजों की खरीद- बिक्री की जाती है. वैसे अब देखना यह दिलचस्प है कि बढ़ते कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासन, राजनीतिक और सामाजिक संगठन गरीबों के अनाज की कालाबाजारी रोकने में आगे आते हैं, या ये खेल यूं ही चलता रहेगा. वैसे एकबार फिर से इस पूरे मामले पर जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने बताया कि हम जांच कर कार्रवाई करेंगे.




