
जमशेदपुर। अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद की ओर से अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माता जानकी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। मौके पर परिषद के अध्यक्ष डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी ने कहा कि मैथिली भाषा अत्यंत मधुर है कारण इस भाषा में स्वर वर्ण अर्थात ह्रस्व का अत्यधिक प्रयोग होता है। व्याकरण के इन्हीं विशेषताओं के कारण मैथिली मीठी एवं कर्णप्रिय होती है। इस भाषा को संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता है। इस अवसर पर परिषद के सचिव विक्रम आदित्य सिंह को मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के संरक्षक का सम्मान मिलने पर उन्हें सम्मानित किया गया। सचिव दीपक कुमार झा ने अपने संबोधन में होने वाली जनगणना कि अहमियत बताते हुए कहा कि मैथिलीभाषी जनगणना में अपनी मातृभाषा अवश्य हीं मैथिली लिखावें। महासचिव पंकज कुमार झा ने कहा कि एकीकृत बिहार में वर्ष 1978 में ही मैथिली को बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल किया गया था। संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में भी वैकल्पिक विषय सूची में मैथिली भाषा और साहित्य सम्मिलित है। इस भाषा को झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भी शामिल किया जाना चाहिए।




