जमशेदपुर : पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार एटक के लीगल सेल द्वारा जमशेदपुर के साकची स्थित बंगाल क्लब के कांफ्रेंस हॉल में एक प्रेस वार्ता किया गया. मजदूरों के शोषण, असुरक्षित कार्यस्थल और औद्योगिक दुर्घटनाओं के संबंध में कंपनियों, ठेकेदारों और एजेंसियों की श्रम कानूनों के उल्लंघन को लेकर सम्पन्न हुई. इस प्रेस वार्ता को लीगल सेल के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार महतो, सचिव गिरीश कुमार सिंह एवं एटक कोल्हान प्रमंडल के महासचिव अम्बुज कुमार ठाकुर ने संबोधित किया. प्रेस को संबोधित करते हुए दिलीप कुमार महतो ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों के लगातार हो रहे शोषण, ठेका मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी, कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों में कथित लापरवाही तथा गंभीर दुर्घटना के बाद पीड़ित मजदूर को उसके वैधानिक अधिकार एवं उचित मुआवजा नहीं मिलने के मुद्दे पर एटक एवं एटक के लीगल सेल द्वारा कंपनी एवं ठेकेदारों द्वारा श्रम कानून के उल्लंघन के खिलाफ कानूनी कार्यवाही पर गंभीरता से विचार कर रही है. एटक एवं एटक का लीगल सेल मांग करता है कि प्रत्येक औद्योगिक प्रतिष्ठान में मजदूरों की सुरक्षा का नियमित निरीक्षण हो तथा दुर्घटना होने पर केवल इलाज कराना पर्याप्त न माना जाए, बल्कि मजदूर के दीर्घकालीन पुनर्वास एवं वैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए. (नीचे भी पढ़ें)
सचिव गिरीश कुमार सिंह ने कहा कि आंशिक अपंगता केवल दुर्घटना नहीं, स्थायी आर्थिक एवं सामाजिक क्षति है. उन्होंने एक ठेका मजदूर के साथ ही टाटा स्टील कलर्स (ब्लूस्कोप) में 21 जून 2026 की दुर्घटना का जिक्र करते हुए बताया कि लगभग रात 9 बजे कार्य के दौरान एक मजदूर का हाथ कोहनी के नीचे से कट गया, जो अत्यंत गंभीर औद्योगिक दुर्घटना है. उन्होंने कहा कि इस मामले में विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जांच आवश्यक है, जिसमें श्रम कोड सेक्शन 6, 10, 14, 22, 23, 24, 33, 46, 47, 53, 54, 55 के तहत जांच की मांग की जाती है. धारा 73, 74, 76, 77, 78 और 82 के अंतर्गत आंशिक और पूर्ण अपंगता की स्थिति में मजदूरों कंपनसेशन के रूप में अनेक महत्वपूर्ण प्रावधान है. अपंगता होने पर धारा 53के तहत ग्रेच्युटी का प्रावधान भी है. एटक कोल्हान प्रमंडल के महासचिव अम्बुज ठाकुर ने कहा कि कानून किताब में नहीं, मजदूर के जीवन में दिखाई देना चाहिए. केंद्र सरकार द्वारा लेबर कोड लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है. लेकिन कानून बनने के बावजूद यदि मजदूर को सुरक्षित कार्यस्थल नहीं मिलता, समय पर पूरा वेतन नहीं मिलता, सामाजिक सुरक्षा की जानकारी नहीं मिलती, दुर्घटना के बाद उचित मुआवजा नहीं मिलता,तो कानून का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होता. (नीचे भी पढ़ें)
इन लोगों ने बताया कि हमारा संघर्ष किसी उद्योग के खिलाफ नहीं है. हमारा संघर्ष मजदूर के शोषण और उसकी सुरक्षा से समझौते के खिलाफ है. उन्होंने प्रशासन एवं श्रम विभाग से मांग की कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों और ठेका एजेंसियों के रिकॉर्ड की जांच की जाए तथा मजदूरों के अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए. इस प्रेस वार्ता में टाटा ब्लू स्कोप वर्तमान में टाटा कलर्स में हुए दुर्घटना के शिकार सन्नी चौधरी, उनकी माता राधिका देवी और छोटे भाई अनिल चौधरी उपस्थित रहे और घटना से संबंधित जानकारी के साथ वेंडर, कंपनी प्रबंधक एवं यूनियन प्रतिनिधियों के नकरात्मक रवैये के खिलाफ असंतोष व्यक्त किया और अपने अपंगता के लिए कंपनी और वेंडर के कार्यशैली पर सवाल उठते हुए अपने और अपने परिवार के भरण पोषण के लिए स्थाई नौकरी और आर्थिक सहयोग की मांग की. इस प्रेस वार्ता में एटक के संरक्षक बीरेंद्र कुमार सिन्हा, उप महासचिव हीरा अरकने, उपाध्यक्ष धनंजय शुक्ला, लीगल सेल के उपाध्यक्ष शशि भूषण कुमार और सह सचिव सूरज कुमार भी उपस्थित रहे.







