
जमशेदपुर : जमशेदपुर के घाघीडीह जेल में विचाराधीन मदर टेरेसा वेलफेयर ट्रस्ट के संचालक हरपाल सिंह थापर की मौत को लेकर सवाल उठने लगे हैं. मृतक के परिजनों ने जहां मौत को लेकर आशंका जतायी है वहीं रंगरेटे महासभा व अन्य संगठनों ने भी इस मामले को लेकर जांच की मांग की है. वहीं हरपाल सिंह थापर के शव का पोस्टमार्टम करने के लिए उपायुक्त ने मेडिकल बोर्ड का गठन किया. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का पता चल पायेगा. इस बीच परिजनों ने पोस्टमार्टम हाऊस पहुंचकर मौत के बाद शव के हालात का वीडियो और फोटो बनाया है, जिसको www.sharpbharat.com को परिजनों ने उपलब्ध कराया है और कहा है कि यह अन्याय है और न्यायिक हिरासत में की गयी हत्या है. इस मामले की अब जांच की मांग उठने लगी है. इस बीच उपायुक्त ने न्यायिक हिरासत में मारे गये व्यक्ति के पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन कर दिया गया है. मेडिकल बोर्ड सारे मामले की जांच करेगा.

हरपाल सिंह थापर की मौत बेहद सिंदेहास्पद, मामले की स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाय जांच : रविशंकर पाण्डेय
राष्ट्रीय स्तर पर लीगल सहायता और विधिक सलाह देने वाली संस्था लीगल पाइपर्स के सदस्य और अधिवक्ता रविशंकर पाण्डेय ने कहा है कि हरपाल सिंह थापर और मदर टेरेसा वेलफेयर ट्रस्ट के मामले में स्थानीय पुलिस प्रारम्भ से ही काफी हड़बड़ी में दिखाई दे रही थी, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे पुलिस, पूरी जांच प्रक्रिया से पहले ही हरपाल और उसके परिवार को जेल भेजना चाहती हो. सालों से अनाथ और गरीब बच्चों को पिता बनकर पालने वाला व्यक्ति आज सालों बाद उन्ही बच्चों के शोषण का आरोपी कैसे बन जाता है. यह गहन जांच का विषय है. कोई 40-50 बच्चों को अपना पेट काटकर उसकी हर जरूरतों को पूरा करता है. फिर उन्हीं बच्चो के साथ दुराचार करता हो यह वास्तविकता से परे प्रतीत होता है. लीगल पाइपर्स की पूरी टीम हरपाल सिंह थापर की बेहद संदेहास्पत मौत और आनन-फानन में की गई पूरी पुसलिसिया कार्रवाई की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग करती है, ताकि लोगों तक सच्चाई पहुंच सके.

थापर की मौत के लिए जेल प्रशासन जिम्मेदार : मंजीत गिल
जेल में बंद हरपाल सिंह थापर की देर रात ही मौत पर रंगरेटा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मंजीत सिहं गिल ने थापर की मौत के लिए सीधे तौर पर जेल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है. श्री गिल ने कहा कि घटना बीती रात की है और जानकारी सुबह मिल रही है. आखिर रात से सुबह तक इस घटना को क्यों दबाकर रखा गया. उन्होने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप कर उच्चस्तरीय जांच की मांग के लिए ट्वीटर पर डीसी जमशेदपुर से अनुरोध किया गया था लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया और न्याय की आस में एक निर्दोष सिख की मौत हो गई. इस घटना से सिख समाज में काफी आक्रोश व्याप्त हो गया है. श्री गिल ने कहा कि मैं सिख समाज के लोगों को बताना चाहता हूं कि थापर सिख मर्यादाओं का पालन करते थे, उनके मामले में सिख समाज के कुछ लोग इसलिए चुप रहे कि उनके बारे में धर्म परिवर्तन की झूठी अफवाहें फैलाई जा चुकी थीं. वहीं थापर के अधिवक्ता बिमल पांडे ने आज फिर कहा है कि यह मामला पूरी तरह से बनावटी और बेबुनियाद प्रतीत होता है. मामले की जड़ कहीं ना कहीं से जमीन विवाद से जुड़ी है, जिसकी कीमत लाखों में बताई जा रही है. उन्होंने कहा कि लड़की का जैक बोर्ड की नौवीं कक्षा का सर्टिफिकेट झारखंड सरकार की साइट में जाकर कोई भी जांच सकता है. इस सर्टिफिकेट को जांचने के बाद यह पता चला है कि लड़की बालिग है, किंतु प्राथमिकी में उसे 17 साल का बताकर नाबालिग दिखाते हुए मामले को गंभीर बनाया गया है. उन्होंने कहा है कि मामला दर्ज होते ही जिस तरह से लगातार पुलिस सक्रिय हुई और उसकी भूमिका नजर आई उससे साजिश की उम्मीद करना भी गलत नहीं होगा. श्री पांडे ने कहा कि देश में दुष्कर्म की धाराओं का गलत इस्तेमाल भी होता है. यह सभी जानते हैं क्योंकि कई झूठे मामले आज भी थानों में लंबित पड़े हैं और कई झूठे मामलों में लोग कोर्ट से बरी भी हो रहे हैं. श्री पांडेय ने कहा कि इस घटना में भी कहीं न कहीं जेल प्रशासन जिम्मेदार है. श्री पांडे ने कहा कि आखिर पुलिस को क्या जरूरत पड़ी थी जो उन्होंने लड़की के कागजात जांचे बिना उसे माइनर दिखाकर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई.





