
जमशेदपुर : विद्या की देवी सरस्वती के पूजन के अवसर पर बसंत पंचमी के दिन समाजसेवी सरदार परमजीत सिंह सबलोक एवं समाजसेवी सरदार कवलजीत सिंह भाटिया ने एक अनूठा कार्य किया। इन दोनों ने ग्रेजुएट कॉलेज फॉर विमेन साकची तथा जमशेदपुर विमेंस कॉलेज बिष्टुपुर में छात्राओं को ‘चमकौर की गढ़ी’ पुस्तक का वितरण किया। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्म की छात्राओं ने सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी के इतिहास एवं चार साहिबजादे के बलिदान पर लिखी गई इस पुस्तक को बड़ी इज्जत से ग्रहण किया तथा इसे पढ़कर गुरु गोविंद सिंह के आदर्शों पर चलने की बात कही। अधिकांश छात्राओं ने इस बात को स्वीकारा कि उन्हें गुरु गोविंद सिंह जी के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं थी। (नीचे भी पढ़ें)
इस पुस्तक को पढ़ने के बाद उन्हें गुरु गोविंद सिंह जी के इतिहास का पता चलेगा। पुस्तक प्राप्त करने वाली छात्राओं ने कॉलेज की अन्य छात्राओं को भी पुस्तक के बारे में जानकारी दी। ‘चमकौर की गढ़ी’ पुस्तक के बारे में छात्राओं के बीच काफी उत्साह दिखाई दिया। मालूम हो इस पुस्तक के लेखक कविवर गंगाप्रसाद ‘कौशल’ हैं। जिन्होंने चमकौर के युद्ध की विभीषिका का वर्णन कविता में किया है। इस पुस्तक में अपने धर्म के प्रति प्रचंड आस्था, बहादुरी और त्याग का वर्णन है। गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने 40 सिख सैनिकों के साथ मुगल सल्तनत के अंतिम बादशाह औरंगजेब की 10 लाख सैनिकों की सेना को धूल चटाई थी। समाजसेवी परमजीत सिंह सबलोक और समाजसेवी कवलजीत सिंह भाटिया का उद्देश्य है कि सिख समाज के लोगों के अतिरिक्त हर धर्म और समाज के छात्र-छात्राओं तक वे गुरु जी के इतिहास को इस पुस्तक के माध्यम से प्रस्तुत करें।






