
जमशेदपुर : भाजपा सोनारी मंडल भारत सेवाश्रम संघ के मंडल अध्यक्ष प्रशांत पोद्दार की अध्यक्षता में अंत्योदय के प्रवर्तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के पुण्यतिथि के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन के साथ समर्पण दिवस के रूप में मनाया गया. जिसमें मुख्य रूप से शामिल मंडल अध्यक्ष प्रशांत पोद्दार, पूर्व मंडल अध्यक्ष गोपाल लहरी, वरिष्ठ नेता महावीर सिंह, महामंत्री किशोर साहू, कृष्णा यादव, संजय रजक, सतेंद्र सिंह यादव, शंकर सिंह, भरत भुषन, विकास साहू,रास बिहारी प्रसाद, संजय मुंडा, राहुल भट्टाचार्य, सुजीत आदित्य, काजल मुखार्जी, डाक्टर दिपक घोष, महिला नेत्री नेहा साहू, कबिता मुंडा, संजीव कुमार, धर्मेंद्र ठाकुर, राकेश दत्ता, भरत सिंह, रवि पोद्दार, अनुज सान्याल, संतोष लोहार, विमल शर्मा, राज शर्मा, गोपाल, मनोज मिश्रा, धनेश्वर, एवं पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता शामिल थे. (नीचे भी पढ़ें)

भाजपा कदमा मंडल ने मनायी पं दीनदयाल की पुण्यतिथि
भाजपा कदमा मंडल के द्वारा स्थानीय भाटिया बस्ती में एकात्म मानववाद के प्रणेता, जनसंघ के संस्थापक सदस्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के पुण्यतिथि को समर्पण दिवस के रूप में मनाया गया. इस अवसर पर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से सांसद प्रतिनिधि चितरंजन वर्मा के साथ सभी कार्यकर्ता पंडित दीनदयाल जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर पंडित दीनदयाल जी के आदर्शों को अनुसरण के संकल्प के साथ संगठन को समर्पण राशि समर्पित किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल उपाध्यक्ष भोला शर्मा ने किया तथा संचालन मंडल के महामंत्री अजय झा ने किया. इस अवसर पर मुख्य रूप से कमल कुमार, शोभा श्रीवास्तव, कार्तिक गोप, निर्दोष वर्मा, संतोष सिंह, डी एन सिंह, गणेश भूमीज, विक्की यादव, विनोद रजक यशवंत सिंह, मनोज कुमार सिंह, तापस सरकार, अभिषेक चतुर्वेदी, प्रमोद कुमार, गुड्डी देवी, बीना देवी सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे. (नीचे भी पढ़ें)

पूर्व भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य ने मनायी पं दीनदयाल की पुण्यतिथि
पूर्व भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य डी डी त्रिपाठी ने एकात्मवाद एवं अंत्योदय के रश्मि पूंज, मानववाद के प्रखर अमिट हस्ताक्षर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के पुण्यतिथि पर अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित की. इस अवसर पर त्रिपाठी ने कहा कि देश में एकात्मवाद की जगह जातिवाद एवं अंत्योदय की जगह जाति पोषक प्रवृति का सुरषा की तरह विकराल रूप में उसके प्रभाव का पुनः बढ़ना वर्तमान के लिए काफी दुर्भाग्यपूर्ण हैं और ये चिंता का विषय तब ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता हैं जब उनके सिद्धांतो की आड़ लेकर व्यवस्था वैसे तत्वों को पोषित करती नज़र आये जिसके खिलाफ उन्होंने अपनी शहादत दी.





