जमशेदपुर : जमशेदपुर के बिष्टुपुर साउथ पार्क कोसी रोड की रहने वाली वर्षा पटेल हत्याकांड में मंगलवार को जमशेदपुर कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सह जिला जज अनिल कुमार मिश्रा की अदालत में मामले की अंतिम गवाह सिक्युरिटी गार्ड विराट सिंह की गवाही हुई. गवाह विराट सिंह ने अपनी गवाही से मुकर गया. उसने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने मुझसे पूछताछ नहीं किया था और न ही वह धर्मेन्द्र सिंह को जानता और पहचानता हैं. उसे आज पहली बार देख हैं. अभियोजन पक्ष ने विराट सिंह का गवाही को होस्टाइल (मुकरना) घोषित कर दिया. (नीचे भी पढ़ें)
विराट ने इससे पूर्व पुलिस को दी बयान में बताया था कि वह टाटा मोटर्स में सुरक्षा गार्ड हैं. कभी-कभी रात्री पेट्रोलिंग के दौरान टेल्को थाना में आता -जाता था. उस समय धर्मेंद्र टेल्को थाने में मुंशी का काम करता था. उसके साथ जान पहचान था कभी कभार उसके क्वार्टर में भी चला जाता था. 12 नवंबर 2021 की रात 11 बजे धर्मेंद्र ने फोन कर कहा कि उसे फिवर और बदन दर्द हो रहा हैं. दवा लेकर आने के लिए बोला गया. उसने दवा लेकर उसके क्वार्टर पहुंचा देखा वह पलंग पर लेटा हुआ था. दवा देने पर वह साइड में रख दिया और बोला दो झोला में कुछ पूजा का सामान है जिसे आज ही पानी में प्रवाहित करना हैं. सूर्य उदय के पूर्व ही प्रवाहित कर देना है. इस पर विराट ने कहा कि इसे रख दे वह पानी में प्रवाहित कर देगा लेकिन धर्मेंद्र ने अपना मोटरसाईकिल निकाला और कहा कि इसे बहते पानी में प्रवाहित करना हैं उसे दोनों झोला दिया, मोटरसाईकिल पर बैठाकर न्यू मार्केट तार कंपनी गोलचक्कर भुईयांडीह होते हुए मानगो पुल पहुंचा दोनों झोला को नदी में प्रवाहित कर दिया. दोनों साकची गोलचक्कर पहुंचा एकाएक धर्मेंद्र ने मोटरसाईकिल बिष्टुपुर की ओर मोड़ दी. कहा बिष्टुपुर थाने चलते है लोगों से मिलकर आते हैं. लेकिन पोस्ट ऑफिस के पास मोटरसाईकिल रोक कर पेशाब करने लगा. फिर वहा से लौटने लगा बोला बाद में जाकर मिल लेंगे. लौटकर दोनों क्वार्टर पर आया तब रात्रि करीब एक बज रहा था. धर्मेंद्र ने उसे कहा कि घर पहुंचकर फोन कर देना. वहा से वह गोविंदपुर अपना घर पहुंचा और धर्मेंद्र को फोन कर घर पहुंचने का सूचना देकर सो गया था. लेकिन विराट सिंह ने अदालत के समक्ष इन बाते से इनकार कर दिया. (नीचे भी पढ़ें)
वर्षा पटेल 12 नवंबर 2021 से ही लापता थी. जब उसकी बहन घर पर 13 नवंबर को आयी थी. तब वहां के लोगों ने कहा था कि वर्षा 12 नवंबर को धर्मेंद्र की बाइक पर सवार होकर कहीं गयी, तब से नहीं लौटी है. 14 नवंबर को भी वह घर नहीं लौटी तब एएसआई धर्मेंद्र को फोन किया. उसने कहा था कि वह जहां भी होगी आ जायेगी. एक सप्ताह के बाद 18 नवंबर को की सुबह टेल्को थाना क्षेत्र के तार कंपनी तालाब से वर्षा का शव बरामद हुआ था. बहन जया ने ही शव की पहचान की थी. शव प्लास्टिक का बोरा में लपेटा हुआ था। गले में सोने की चेन थी और पीले रंग का शूट पहनी हुई थी. शव से दुर्गंध आ रही थी. शव देखकर वर्षा की बहन जया ने वर्षा की शव होने की पुष्टि की थी.






