जमशेदपुर : भूमिज समाज ने बुधवार को साकची आमबगान से रैली निकाली एवं डीसी ऑफिस पहुंच कर वहां अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया एवं डीसी ऑफिस में एक ज्ञापन भी सौंपा. भूमिज समाज का आरोप है कि पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो झारखंड विद्रोह पर लिखी अपनी पुस्तकों में भूमिज समाज के इतिहास को विकृत करने एवं उनके पूर्वजों के इतिहास को कल्पित कहानियों के आधार पर हड़पने का प्रयास कर रहे हैं. इसको लेकर भूमिज समाज पूर्व सांसद की दो पुस्तकों, झारखंड की समरगाथा एवं झारखंड में विद्रोह का इतिहास के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग कर रहा है. (नीचे भी पढ़ें)

बता दें कि पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने विगत वर्षों में दाश के आजादी से पूर्व झारखंड क्षेत्र में आजादी के लिए चले संघर्ष के साथ ही झारखंड क्षेत्र के इतिहास पर कई पुस्तकों की रचना की है. इन पुस्तकों में क्षेत्र के आंदोलनकारियों एवं उनके संघर्ष को दर्शाने की कोशिश की गयी है. किन्तु भूमिज समाज का कहना है कि पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो की पुस्तकों में भूमिज समाज के इतिहास को विकृत करने एवं सुनी-सुनाई कहानियों के आधार पर भूमिज समाज के इतिहास को हड़पने का प्रयास किया गया है. उनका कहना है कि शैलेंद्र महतो भूमिजों के प्रसिद्ध चुआड़ आंदोलन के इतिहास को रघुनाथ महतो नाम के काल्पनिक व्यक्ति के जरिये हड़पने की कोशिश कर रहे हैं. उनका मानना है कि कथित रघुनाथ महतो का शैलेंद्र महतो नीमडीह प्रखंड के जिस घुटियाडीह गांव में जन्म बताते हैं, वर्ष 1738 के काल में वहां महतो समुदाय का कोई भी व्यक्ति नहीं रहता था. ऐसे ही और कई तर्कों के आधार पर भूमिज समुदाय शैलेंद्र महतो पर इतिहास को विकृत कर चुआड़ आंदोलन का श्रेय हड़पना चाहते हैं. शैलेंद्र महतो की उपर्युक्त दो पुस्तकों में इसका जिक्र आने की बात करते हुए भूमिज समाज उन पुस्तकों का प्रकाशन रोकवाने की मांग कर रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
रैली के कारण रही जाम की स्थिति

इसी को लेकर भूमिज समाज ने साकची आमबगान से एक बड़ी रैली निकाली, जो डीसी ऑफिस पहुंच कर प्रदर्शन में तब्दील हो गयी. हालांकि इस दौरान सड़क जाम होने के कारण शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रही. साकची हावड़ा ब्रिज से लेकर साकची गोलचक्कर तक ट्रैफिक रुक सा गया, जिससे लोग काफी परेशान रहे. उधर डीसी ऑफिस पर प्रदर्शन के पश्चात भूमिज प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त कार्यालय में अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो की उपर्युक्त दोनों पुस्तकों के प्रखाशन पर रोक लगाने की मांग की गयी है.











