गालूडीह : गालूडीह के दारिसाई स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र दारिसाई में शुक्रवार को कुलपति निर्देशक अनुसंधान बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, निदेशक प्रशासन, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची सह निदेशक क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र दारिसाई के नाम स्थानीयता के आधार पर अनुकंपा में और क्षेत्रीय अनुसंधान के कर्मियों को प्राथमिकता देते हुए नियुक्ति के लिए मजदूरों द्वारा आवेदन सौंपा गया. आवेदन पत्र में मजदूरों कि मांग है कि विगत 1989 से इस अनुसंधान केंद्र दारिसाई में कार्यरत है. स्थानीयता का प्राथमिकता एवं संरक्षक की वरीयता को ध्यान में रखते हुए अनुकम्पा के आधार पर एवं संबंधित जगहों से कार्यरत कर्मियों की योगदान कराया जाए. (नीचे भी पढ़ें)

वहीं उनकी मांग यह भी है कि कुछ महीना पहले जिन लोगों की योगदान अनुकम्पा के आधार पर हुई है जिसमें स्टोर कीपर शिप्रा पाल, स्वीपर पूनम कुमारी मुंडा, माली- मोबिन आलम दारिसाई अनुसंधान केंद्र शमिल हैं. उन्हें स्थानीयता को ध्यान में रखते हुए अभिभावक संरक्षक जहां से उनकी मृत्यु हुई है, उन्हें उसी जिले में समायोजित किया जाए और अगर पद खाली नहीं है तो उन्हें मुख्यालय में उन्हें योगदान दिया जाए. उन्होंने कहा है कि जिला आधार पर आरक्षण रोस्टर बनाया गया है. उसका अनुपालन किया जाए तथा स्थानीय लोगों की नियुक्ति देकर पुनः स्थान्तरण दुमका किया गया जो की गलत है. (नीचे भी पढ़ें)
मजदूरों ने कहा कि उन्हें सूत्रों से पता चला है कि तीन अन्य पदों पर आदेशपाल, चौकीदार टंकण पर योगदान देने की सम्भावना है. अतः इस पर सभी मजदूर कर्मियों को बिना विलंब के पूर्णत रोक लगाया जाये. वहीं उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो मजदूर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने एवं अनुसासनत्मक कार्यवाही नहीं होने पर शोध से सम्बंधित कार्य एवं क्षेत्रीय कार्य पूर्णता वाधित रहेगा. इसके साथ ही सभी मजदूर मिलकर कार्यालय को भी बंद करने के लिए बाध्य होंगे. इसका जिम्मेवार बिरसा कृषि विश्वविद्यालय व रांची के संबंधित वरीय पदाधिकारी होंगे.











