रांची : माओवादी रीजनल कमेटी के सदस्य दुर्योधन महतो ने रांची में झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के समक्ष शुक्रवार को आत्मसमर्पण कर दिया. बताते चले कि नक्सली दुर्योधन महतो 15 लाख रुपए का इनामी नक्सली है. नक्सलियों के बीच दुर्योधन महतो को मिथिलेश सिंह, बड़ा बाबू और बड़का दा के नाम से भी जाना जाता हैं. दुर्योधन महतो धनबाद के तोपचांची के गेंदनावाडीह का रहने वाला है. प्राप्त जानकारी के अनुसार ऑपरेशन नई दिशा से प्रभावित होकर दुर्योधन ने सरेंडर किया है. इससे पहले वह सरेंडर होने को लेकर पुलिस से संपर्क में था. बतौर दुर्योधन वह लंबे समय से मुख्यधारा में जुड़ना चाहता था. बताते चले कि दुर्योधन महतो कई सालों से लुगू पहाड़ और झुमरा पहाड़ में सक्रिय था और संगठन का काम कर रहा था. (नीचे भी पढ़ें)
अपने सरेंडर पर दुर्योधन महतो ने कहा कि आज जितने भी नक्सली और माओवादी हैं, सभी को सरकार की आत्मसमर्पण नीति के बारे में विचार करना चाहिए. आने वाले समय में युवाओं को इन संगठनों से नहीं जुड़ना चाहिए. दुर्योधन महतो ने बताया कि वह 1991 में माओवादी संगठन से जुड़ा था. 2004 में तोपचांची से गिरफ्तारी के बाद 2013 में जेल से रिहा हुआ और फिर से नक्सली गतिविधियों में शामिल हो गया. पूरे राज्य में दुर्योधन महतो के खिलाफ 104 केस दर्ज हैं. आईजी (ऑपरेशन) अमोल वीणुकांत होमकर ने बताया कि पिछले तीन साल में 50 से भी अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है, साथ ही साथ कई नक्सलियों की गिरफ्तारी भी हूई हैं. उन्होंने कहा कि अब एक तरह से झारखंड में नक्सवाद अपने खात्मे की तरफ है. आने वाले समय में नई दिशा से प्रभावित होकर और भी नक्सली सरेंडर करेंगे. कार्यक्रम के दौरान डीआईजी पंकज कंबोज, सीआरपीएफ के अधिकारी के साथ साथ कई पुलिस पदाधिकारी मौजूद रहे.












