रामगोपाल जेना/चाईबासा : झारखंड पुनरुत्थान अभियान ने झारखंड सरकार से आयता गांव में कुजू नदी तट पर छठ घाट बनाने की निविदा एवं कुजू डैम को रद्द करने की मांग की है. संगठन ने इसके लिए लड़ाई लड़ने की घोषणा की है. संगठन ने कहा है कि आदिवासियों की संस्कृति पर दूसरी संस्कृति थोपने वाले विकास मॉडल को कोल्हान के नॉन रेगुलेशन एरिया में सहन नहीं किया जाएगा. (नीचे भी पढ़ें)
उक्त बात झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक, बड़ा झींकपानी पंचायत के पूर्व मुखिया कोलंबस हांसदा ने कही है. कोलंबस हांसदा ने कहा है कि अनुसूचित जिले में बिना पारंपरिक ग्राम सभा के योजना का चयन और क्रियान्वयन पेसा कानून की अवमानना है. साथ ही जिले के पदाधिकारियों को इस अनुसूचित जिले में सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के तहत कार्य करने की कार्यसंस्कृति बंद करनी चाहिए. मौके पर उपस्थित पूर्व राज्यसभा सांसद डीपी जामुदा ने कहा कि जिला के प्रशासनिक अधिकारियों में निष्ठा और ईमानदारी की घोर कमी देखी जा रही है, साथ ही इस अनुसूचित जिले में कल्याणकारी विकास कार्यक्रम की निगरानी अधिकारियों को जिस कर्तव्य परायणता से करनी चाहिए वो दिखाई नहीं देती, बल्कि इस जिले में योजनाओं का क्रियान्वयन करने में कार्यकारी एजेंसी गुणवत्ता को कायम नहीं रखती, यह दुर्भाग्यपूर्ण है.(नीचे भी पढ़ें)
पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू ने कहा कि जिले की जनता को जिला की बेहतरी के लिए आगे आना होगा. कहते हैं कि जिस क्षेत्र की जनता मौन और खामोश रहे, वहां सरकार और क्षेत्र के जन प्रतिनिधि भी गैर जिम्मेदार हो जाते हैं. जनता जिस प्रतिनिधि को वोट देकर जिताती हो, उससे जनहित के मुद्दे पर सवाल करना चाहिए, क्योंकि जन प्रतिनिधि पुल पुलिया, ट्रांसफॉर्मर शिलान्यास और उद्घाटन करने मात्र के लिए नहीं होते. जिले में त्राहिमाम कर रही जनता से उनके दुःख-तकलीफ के बारे में पूछना-जानना उनकी जिम्मेदारी है. झारखंड पुनरुत्थान अभियान की आवश्यक बैठक पूर्व सांसद डीपी जामुदा के आवास पर अभियान के मुख्य संयोजक सन्नी सिंकू के संयोजन में संपन्न हुई. बैठक में झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक अधिवक्ता महेंद्र जामुदा भी उपस्थित थे.











