जमशेदपुर : टाटा स्टील की संयुक्त कमेटियों की उपयोगिता और उनके कार्यों की गतिशिलता को और बढ़ाया जायेगा. इसके लिए नये सिरे से तीन कमेटियों की समीक्षा की जायेगी. यह फैसला टाटा स्टील और टाटा वर्कर्स यूनियन की सर्वोच्च कमेटी जेसीसीएम की बैठक में लिया गया. सिंगापुर में हुई जेसीसीएम की बैठक में कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. इसमें टाटा स्टील के एमडी सह सीइओ टीवी नरेंद्रन, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर कौशिक चटर्जी, सभी वाइस प्रेसिडेंट और टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, महामंत्री सतीश सिंह, डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे. इस दौरान यह बताया गया कि जेसीसीएम सर्वोच्च कमेटी है, उससे नीचे जेडब्ल्यूसी है जबकि विभागों में जेडीसी है. (नीचे भी पढ़ें)
अभी यह प्राय: देखा जा रहा है कि जो मुद्दा जेडीसी में उठ जा रहा है, उसी मुद्दे को फिर से जेडब्ल्यूसी और फिर जेसीसीएम तक में उठा दिया जा रहा है. ऐसे में इसकी उपयोगिता को देखा जाना चाहिए. इस दौरान चार अलग-अलग ग्रुप बनाकर इसकी उपयोगिता पर चर्चा की गयी और कहा गया कि संयुक्त समितियों की उपयोगिता काफी ज्यादा है. यहीं वजह है कि 95 साल से टाटा स्टील में औद्योगिक सौहार्द बना हुआ है. ऐसे में इसको और बेहतर करने की जरूरत है. इस पर तय हुआ कि जेडीसी के मंच को और धारदार बनाया जायेगा ताकि मुद्दे वहां सुलझ जाये. अगर मुद्दे नहीं सुलझा तो इसकी सुनवाई जेडब्ल्यूसी में की जायेगी. अगर जेडब्ल्यूसी में मामला नहीं सुलझा तो फिर इसको जेसीसीएम में लाया जाना चाहिए. (नीचे भी पढ़ें)
इस पर तय किया गया कि जो मुद्दे उठाया जाये, उसका त्वरित निष्पादन भी किया जाये. इसकी मोनिटरिंग भी होती रही. यहां यह भी चर्चा उठी कि हाल के दिनों में छोटे छोटे विभागों में जेडीसी को संचालित की जा रही है. जबकि पहले से बड़े विभागों में भी जेडीसी चल रहा है. ऐसे में क्या इसकी संख्या को कम किया जाना चाहिए ताकि काम और बेहतर हो सके. छोटे छोटे जेडीसी का समायोजन किया जाये ताकि बेहतर तरीके से काम हो सके. इसकी संभावनाओं को भी तलाशा जायेगा. इस दौरान यह भी कहा गया कि टाटा स्टील की सबसे पुरानी और मदर यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन है. यूनियन के सहयोग से ही कंपनी का 95 साल सौहार्दपूर्ण बीता है. ऐसे में अब चूंकि टाटा स्टील का विस्तार अन्य जगहों पर भी हो गया है, इस कारण उन सारी यूनियनों को किस तरह परिपक्व बनाना है, इस पर भी टाटा वर्कर्स यूनियन को पहल करने को कहा गया ताकि वहां का नेतृत्व भी और बेहतर हो सके.



