जमशेदपुर : राइट टू एजुकेशन (आरटीई) और निजी विद्यालयों के मान्यता के प्रश्न पर प्राइवेट स्कूल्स एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन पासवा द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को हाईकोर्ट ने 2019 के निजी विद्यालयों पर मान्यता के प्रश्न पर कार्रवाई न करने के पुराने आदेश (स्टे आर्डर)को जारी रखा है. पासवा द्वारा इस केस के वरीय अधिवक्ता ओंकारनाथ तिवारी और उनकी टीम ने इस प्रश्न पर निजी विद्यालयों का पक्ष रखते हुए कहा कि जब उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में ही निजी विद्यालयों पर किसी तरह की पीड़क कार्रवाई पर उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाया गया था तथा स्टे जारी किया गया था, तब भी लगातार निजी विद्यालयों को शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों द्वारा लगातार मान्यता के प्रश्न पर पुनः आवेदन देने को बाध्य किया जा रहा है. पासवा द्वारा जारी केस पर पासवा के अधिवक्ता की टीम की बातों को सुनते हुए उच्च न्यायालय ने अपने स्टे आदेश को जारी रखते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में निजी विद्यालयों पर अगले आदेश तक मान्यता के प्रश्न पीड़क कार्रवाई नहीं करने के आदेश को बहाल रखा. पासवा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दुबे पासवा द्वारा जारी केस की सुनवाई के लिए स्वयं अधिवक्ता ओंकारनाथ तिवारी की टीम के साथ उच्च न्यायालय में सशरीर उपस्थित रहे. अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने पासवा द्वारा जारी इस केस में केस की अगली सुनवाई की तिथि 17 अक्टूबर रखी है. (नीचे भी पढ़ें)

निजी विद्यालयों की संरक्षक है पासवा : रमन झा
पासवा के पूर्वी सिंहभूम जिलाध्यक्ष रमन झा ने कहा है कि निजी विद्यालयों के हितों की रक्षा करने वाली देश की सबसे बड़ी संस्था है जो झारखंड आलोक दुबे के नेतृत्व में बहुत ही सराहनीय काम कर रही है. उन्होंने कहा की आरटीई के नाम पर मान्यता के लिए 2019 में हुए संशोधन रूपी काले कानून को निरस्त करवाने के लिए विधायक सरयू राय के माध्यम से विधानसभा में मुद्दे को उठाया गया. इस संदर्भ में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी एक प्रतिनिधिमंडल मिला था जिसपर उन्होंने सकारात्मक पहल करने का आश्वाशन दिया था और आज न्यायालय के माध्यम से भी इसके खिलाफ सफलता पाई.











