बेंगलुरु : इसरो का लैंडर विक्रम शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद की सतह पर लैंड करेगा. इसके लिए बेंगलुरु के मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स (मॉक्स) में वैज्ञानिक तैयार बैठे हैं, लेकिन उनके चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा है. इसरो ने कहा है कि उसने पिछली बार की असफलता से सीख लेकर इस बार सारी खामियों को दुरुस्त किया है. (नीचे भी पढ़ें)

लैंडर विक्रम जैसे ही अपने उतरने की जगह फिक्स करेगा उसके बाद सारी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. लैंडर विक्रम हॉरिजॉन्टल से वर्टिकल वाली स्थिति में आएगा. इसके बाद बेंगलुरु से विक्रम को चांद पर उतरने का आदेश देगा. ये शुरुआत 25 किलोमीटर की दूरी से होगी. लैंडर विक्रम जैसे ही इसरो कमांड सेंटर से आदेश मिलेगा वह 1.68 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से चांद की सतह की तरफ बढ़ना शुरू करेगा. इस दौरान उसे चांद के गुरुत्वाकर्षण से भी निपटना होगा.(नीचे भी पढ़ें)

जैसे ही लैंडर विक्रम नीचे की तरफ जाना शुरू होगा उसके सारे इंजन स्टार्ट हो जाएंगे. इसके बाद लैंडर की रफ्तार को कम किया जाएगा. इस दौरान विक्रम अपने सारे कलपुर्जे के साथ जांच कर चुका होगा. यानी गड़बड़ी का कोई चांस नहीं. इस दौरान लैंडर हॉरिजॉन्टल वाली स्थिति के बाद से वर्टिकल वाली स्थिति में पहुंचेगा. यह चरण काफी नाजुक होगा. इस दौरान विक्रम अपने लिए उतरने की सही जगह भी तलाशता रहेगा.(नीचे भी पढ़ें)
लैंडिंग वाली जगह देखने के बाद चांद की सतह से करीब साढ़े 7 किलोमीटर ऊपर लैंडर विक्रम एक बार फिर से अपनी लैंडिंग स्पॉट की जांच करेगा ताकि कहीं कोई खामी नहीं रहे. इसरो ने लैंडर के लिए अपग्रेडेड तकनीक का इस्तेमाल किया है ताकि लैंडिंग एकदम सही हो. लैंडर विक्रम उतरने से पहले अपनी लैंडिंग वाली जगह की अंतिम बार तस्वीर लेगा और फिर जब उसके सेंसर को ये पता चल जाएगा कि नीचे उतरना सुरक्षित है तो वह अपनी रफ्तार को धीमी करते हुए चांद की सतह पर उतरना शुरू करेगा. जब सारी प्रकियाएं पूरी हो जाएंगी, इसके बाद लैंडर विक्रम चांद की सतह पर उतरेगा. इस दौरान विक्रम अपने कंप्यूटर के जरिए सुरक्षित लैंड करेगा और लैंडिंग के सफल होने के करीब 4 घंटे बाद इससे रोवर प्रज्ञान बाहर आएगा.











