
घाटशिला : विधानसभा चुनाव की दस्तक होते ही माओवादियों की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. 21- 22 सितंबर की रात नक्सलियों ने धालभूमगढ़ और मुसाबनी थाना क्षेत्र में पोस्टर साट कर सनसनी फैला दी. धालभूमगढ़ के स्वर्णरेखा नदी से सटे गोगलो और डेडांग तथा मुसाबनी के बाकड़ा पुल के पास नक्सलियों के पोस्टर पाए गए. सभी पोस्टर लाल रंग से हस्तलिखित थे और निवेदक के रूप में सीपीआई माओवादी अंकित था. पुलिस ने इन पोस्टरों को जब्त कर लिया है. उक्त पोस्टर माओवादियों के हैं या फिर शरारती तत्वों के हैं, की जांच पुलिस कर रही है. पोस्टरों में नागरिक सुरक्षा समिति के नेता शंकर चंद्र हेंब्रम और शैलेंद्र बास्के तथा मुसाबनी के बीडीओ को जन अदालत में सजा देने की बात कही गई है.
पोस्टरों में कहा गया है कि नासुस दलाल शंकर चंद्र हेंब्रम शैलेंद्र बास्के और पुलिस प्रशासन की मदद करने वाले दलालों को जन अदालत में सजा दो. एरिया कमांडर सुपाई टुडू के एनकाउंटर में मुख्य भूमिका निभाने वाले नासुस के दलाल विराम मुर्मू को जन अदालत में सजा दो. अपने गांव में अपना राज्य कायम करो. विदित हो कि इसके पूर्व 14 अगस्त को मुसाबनी के बीडीओ को डाकघर के माध्यम से पत्र भेजकर पांच लाख की लेवी मांगी गई थी. पत्र में निवेदक के रूप में माओवादी का जिक्र था. ज्ञात हो कि जिन इलाकों में पोस्टर साटे गए हैं, वे इलाके नक्सल मुक्त गुड़ाबांदा प्रखंड की सीमा से सटे हैं. वर्ष 2017 में 15 फरवरी को इनामी नक्सली कमांडर कान्हू मुंडा तथा सीरियल किलर नक्सली फोगड़ा मुंडा और उसके साथियों ने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया था. उसके बाद से गुड़ाबांदा और उससे सटे उक्त इलाके नक्सल मुक्त हो गये थे. नक्सली गतिविधियां खत्म हो गई थी और ग्रामीण अमन चैन की जिंदगी जी रहे थे. उसके बाद से यह पहला मौका है जब माओवादियों के पोस्टर पाए गए. बहरहाल, पुलिस पोस्टरों की जांच में जुटी है कि उक्त पोस्टर माओवादियों के है या फिर शरारती तत्वों द्वारा साटे गए हैं?



