
जमशेदपुर : टाटा स्टील के जमशेदपुर में कर्मचारियों के क्वार्टर को लेकर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसको लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन के सहायक सचिव नितेश राज ने एस्टेट विभाग में पुराने तरीके से ही क्वार्टर का फिक्स अप या अलॉटमेंट करने के लिए टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष, महामंत्री और डिप्टी प्रेसिडेंट को पत्र लिखा है. आपको बता दे कि हाल में ही टाटा स्टील के कर्मचारियों के क्वार्टर के अलॉटमेंट और उसके फिक्स अप के सिस्टम को ही बदल दिया गया है. इसको लेकर कर्मचारियों को काफी परेशानी हो रही है. सहायक सचिव नितेश राज ने अपने पत्र में कहा हैं कि आज से 1 साल पहले यूनियन और प्रबंधन के साथ तय किया गया था कि अब जो भी क्वार्टर कर्मचारी द्वारा हैंड ओवर किया जाएगा उसको इस्टेट विभाग द्वारा वैल्यूएशन करके कर्मचारियों को पैसा दिया जाएगा और उसके बाद ही नए कर्मचारी को वह घर एलाॅट होगा.
नितेश राज ने कहा है कि उन लोगों ने उसी समय मांग की थी इस व्यवस्था को चालू नहीं किया जाए, यह व्यवस्था क्वार्टर के संख्या को देखते हुए और इस्टेट विभाग के संसाधनों को देखते हुए हकीकत में पूरा हुआ होता नहीं दिख रहा और आज 1 साल बाद स्थिति यह है कि जो कर्मचारी आज से 1 साल पहले अपने नाम पर घर एलाॅट कराए उनको घर एलॉट भी हो गया और आज तक आश्चर्य की बात है उनको अपना क्वार्टर मिल नहीं पाया. पहले के समय में एलाॅटमेंट के 3 दिन के बाद हैन्डोवर हो जाता था और उसके बाद जुसको द्वारा जो मेंटेनेंस वर्क है उसको पूरा करके कर्मचारी को दिया जाता था. नितेश राज ने निवेदन किया है कि बहुत सारा प्लानिंग ऐसा होता है जिसको अमलीजामा पहनाना असंभव होता है. इस कारण जल्द से जल्द इस्टेट विभाग में पुराना व्यवस्था लागू किया जाए और पुराना व्यवस्था तब तक चले जब तक की सारे क्वाटर का वैल्यूएशन का काम कंप्लीट नहीं हो जाता है. ऐसी स्थिति में बहुत सारे कर्मचारी हैं, जिनके पिता रिटायर हो चुके हैं, मेडिकल बुक की सुविधा बंद हो गई है लेकिन उनको अभी तक घर हैंडोवर नहीं हुआ है.
तमाम कमेटी मेंबर से पदाधिकारी तक लगातार इस चीज को लेकर इस्टेट विभाग के पदाधिकारी से लेकर टॉप थ्री को अवगत कराया गया है. सहायक सचिव ने कहा है कि अब स्थिति यह है कि कर्मचारी को जवाब देना तमाम कमेटी मेंबरों के लिए मुश्किल काम हो गया है. श्री राज ने गुजारिश की है कि मामला को काफी गंभीरता पूर्वक लेते हुए अविलंब उच्च प्रबंधन से बात कर इस्टेट विभाग के पुराने व्यवस्था को लागू किया जाए.




