बहरागोड़ा : बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र के बेंदा, राजलाबांध, उईनाला, दुबराजपुर, चड़कमारा, रागांनिया, माटिहाना, बामडोल, मधुआबेड़ा, केशरदा, गुहियापाल, झरिया, मानखांदा, तिलो, कोटशोल आदि गांव में गृहलक्ष्मी की पूजा धूमधाम से की गयी. महिलाएं घर के दरवाजों पर सफेद रंग की पेंटिंग बनाती हैं, भगवान की मूर्तियों को स्नान कराती हैं और खास भोग बनाकर उनकी पूजा करती हैं. पूजा के अंत में आरती की जाती है और मूर्तियों को एक साल के लिए सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है. बंगाली अग्रहायण माह के अंतिम गुरुवार को सभी घरों में मां गृहलक्ष्मी की पूजा होती है. इस दौरान घर में ही रखे पीतल के भगवान की मूर्तियों को पूजा जाता है. सुबह महिलाओं ने अरवा चावल से तैयार किया गया सफेद रंग से घर के सभी दरवाजे में पेंटिंग बनाती हैं. फिर सदियों से रखे हुए मां लक्ष्मी व अन्य भगवान की मूर्ति को निकाल कर चावल को हल्दी के साथ पीसकर लेप बनाते हैं फिर उसको भगवान की मूर्ति पर लेप लगाकर मूर्तियों को नहलाते हैं फिर घर की महिलाएं गेंदा फूल, ध्रुवा घांस, बेर पत्ता आदि देकर मंत्रोच्चारण के साथ पूजा करती हैं. (नीचे भी पढ़ें)
तत्पश्चात महिलाओं ने घर का बनाया हुआ घी से खास तरह से 11 प्रकार के भोग बनाकर भगवान को सेवन करवाती हैं, फिर सभी के बिच भोग वितरण किया जाता है. शाम को आरती व मां गृहलक्ष्मी का किताब पढ़कर पूजा का समापन होता है. उसके बाद पीतल के मूर्ति को घर के ऐसे स्थान में रखा जाता है, जहां फिर एक साल तक कोई स्पर्श नहीं कर सके. फिर अगले साल इसी दिन पूजा की जाती है. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है.



