नयी दिल्ली / रांची : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को 10 साल तक संविदा में काम करने के बाद निकाले गए अभियंताओं की सेवा नियमित करने का आदेश दिया है. न्यायाधीश विक्रम नाथ व न्यायाधीश संदीप मेहता की पीछ ने भोलानाथ बनाम झारखंड सरकार के मामले में सुनवाई के बाद यह आदेश सुनाया है.साथ ही यह भी कहा है कि स्वीकृत पदों पर लंबे समय तक काम लेने के बाद सरकार उनकी सेवा नियमित करने से इनकार नहीं कर सकती है.वर्ष 2012 में राज्य के भूमि संरक्षण विभाग में विज्ञापन निकाल कर 22 जूनियर इंजीनियरों(जेई) को कृषि विभाग में स्वीकृत पदों पर नियुक्त किया था.इनकी नियुक्ति को संविदा के दायरे में रखा गया था. पहले उनकी नियुक्ति एक साल के लिए की गयी थी. बाद में अवधि विस्तार देने के लिए उनके काम के संतोषप्रद होने की शर्त रखी गयी थी.इन इंजीनियरों को नियुक्ति के बाद लगातार 10 साल तक अवधि विस्तार दिया गया. (नीचे भी पढ़े)
वर्ष 2023 में अचानक इनकी सेवा समाप्त कर दी गयी. इंजीनियरों ने सरकार के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की. हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया, कोर्ट का कहना है कि संविदा के आधार पर काम करने केबाद सेवा का नियमितीकरण करने का कोई प्रावधान नहीं है, इस आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया.हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद इंजीनियरों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इंजीनियरों के पक्ष में फैसला सुनाया. न्यायालय ने कहा कि काम के संतोषजनक होने के आधार पर इंजीनियरों से लगातार 10 साल तक काम लेने केबाद उन्हें नियमित करने इनकार करना न्यायोचित नहीं है. यह न सिर्फ मनमाना है कि बल्कि संविधा के अनुच्छेद 14 के प्रावधान का उल्लंधन भी है.



