जमशेदपुर : जमशेदपुर के जुगसलाई नगर परिषद के पार्षदों और पदाधिकारियों ने होल्डिंग टैक्स में वृद्धि के सरकार के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है. जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जहां एक ओर क्षेत्र में बुनियादी नागरिक सुविधाओं का अभाव है, वहीं दूसरी ओर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
‘टैक्स निर्धारण वैज्ञानिक नहीं’ : पार्षद अनिल मोदी ने टैक्स वृद्धि का विरोध करते हुए कहा कि यह निर्णय पूरी तरह अवैज्ञानिक है. उन्होंने बताया कि लगभग तीन वर्ष पूर्व भी टैक्स बढ़ाया गया था, जिसे भारी जनविरोध के बाद वापस लेना पड़ा था. ऐसे में 1 अप्रैल से पुनः इसे लागू करना उचित नहीं है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक ही गली या मोहल्ले में समान आकार के भवनों पर अलग-अलग होल्डिंग टैक्स लगाया जा रहा है, जो व्यवस्था में स्पष्ट विसंगति को दर्शाता है. सरकार भले ही 15-20 प्रतिशत वृद्धि की बात कर रही हो, लेकिन वास्तविकता में यह बढ़ोतरी कई मामलों में लगभग दोगुनी हो रही है, जिससे मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों पर गंभीर असर पड़ेगा. (नीचे भी पढ़ें)
विकास कार्यों पर पड़ रहा असर : नगर परिषद की उपाध्यक्ष अर्चना दुबे ने कहा कि टैक्स वृद्धि के कारण जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र में काम करने में कठिनाई हो रही है. जनता विकास कार्यों की बजाय टैक्स बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठा रही है और इसका सीधा असर क्षेत्र के विकास पर पड़ रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
सरकार से की प्रमुख मांगें : पार्षदों और पदाधिकारियों ने होल्डिंग टैक्स वृद्धि के फैसले पर पुनर्विचार कर इसे तत्काल प्रभाव से वापस लिये जाने, टैक्स बढ़ाने से पहले नगर परिषद क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं में सुधार किये जाने, टैक्स निर्धारण के लिए पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रणाली लागू किये जाने की मांग की है.



