रांची : झारखंड पुलिस की एडीजी सुमन गुप्ता की अध्यक्षता में पुलिस मुख्यालय सभागार में सभी प्रक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक, क्षेत्रीय पुलिस उप-महानिरीक्षक, वरीय पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक (रेल सहित) के साथ नये आपराधिक कानूनों के तहत कांडों के अनुसंधान में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग, कांडों का स-समय निष्पादन एवं वैज्ञानिक अनुसंधान की स्थिति की समीक्षा की गई. इस समीक्षा बैठक में उपरोक्त पदाधिकारी ऑनलाइन माध्यम से एवं डीआईजी कार्तिक एस, डीआईजी संध्या रानी मेहता, एटीएस के एसपी ऋषभ झा एवं पुलिस मुख्यालय की संबंधित टीम भौतिक रुप से उपस्थित रहे. समीक्षा में अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा उक्त तथ्यों पर जिलों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई. (नीचे भी पढ़े)

समीक्षोपरांत शत-प्रतिशत कांडों के अनुसंधान में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से साक्ष्य संकलन यथा-घटनास्थल व अपराध दृश्य की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी, सर्च एवं सीजर की विडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी, वादी, पीड़ित, अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान की इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग के लिए ई-साक्ष्य मोबाईल ऐप का उपयोग करने का निर्देश सभी जिलों को दिया गया. इसके साथ ही वैसे कांडों जिसमें सात वर्ष या उससे अधिक की सजा प्रावधानित हो. उसमे अनिवार्य रुप से घटनास्थल के निरीक्षण एवं वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलन के लिए फोरेंसिक टीम को अविलंब घटनास्थल पर बुलाने, बीएनएसएस में प्रावधानित निर्धारित समय सीमा 60 एवं 90 दिन के भीतर कांडों का अनुसंधान पूर्ण करने का निर्देश भी सभी जिलों को दिया गया. (नीचे भी पढ़े)

उपरोक्त निर्देशों का अनुपालन जिला स्तर पर सुनिश्चित कराने की जिम्मेवारी क्षेत्रीय पुलिस उप महानिरीक्षकों को निर्धारित करते हुए इन बिन्दुओं पर नियमित समीक्षा एवं अनुश्रवण करने का निर्देश दिया गया. अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा समीक्षा के क्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि सीसीटीएनएस में रियल टाईम एवं गुणवत्तापूर्ण डाटा की प्रविष्टि सुनिश्चित की जाये. सीसीटीएनएस में डाटा की गुणवत्ता के महत्व के संबंध में माह मई-जून 2025 में राज्य स्तर पर अभियान के रुप में पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों के लिए प्रशिक्षण प्रस्तावित होने की बात भी अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा बताई गई.











