जमशेदपुर : “जहां रिस्क है वहां हमारी टीम की एंट्री फिक्स है.” सांपों से लोगों की ही नहीं लोगों से भी सांपों की रक्षा करती है छोटू और उनकी टीम. मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव उर्फ छोटू स्नेक ब्वॉय के नाम से मशहूर है. छोटू ने अभी तक 5000 सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू करके दलमा के फॉरेस्ट में रिलीज कर चुके हैं. छोटू 15 साल से यह काम कर रहे हैं. वे न सिर्फ सांपों से इंसान की रक्षा करते हैं बल्कि इंसानों से सांपों को भी बचते हैं. उनकी टीम का कहना है जहां रिस्क है वहां हमारी टीम की एंट्री फिक्स है. इस टीम में टोटल 7 से 8 लोग हैं. जमशेदपुर के हर क्षेत्र में छोटू की टीम मौजूद है जब भी कहीं से कॉल आता है उस क्षेत्र के स्नेक सेवर तुरंत रेस्क्यू करने निकल जाते हैं. छोटू बताते हैं कि झारखंड में महज 5 प्रजाति सांप जहरीले है. जैसे गेहूंअन (नाग), करेंत (चिती), बैंडिड करैत, रसल वाइपर, बंबूपिट वाइपर शामिल है और बाकी सांपों में जहर नहीं होता है. (नीचे भी पढ़ें)

छोटू बताते हैं कि अपने जमशेदपुर में कुछ-कुछ की जगह जहरीले सांप पाई जाती है. जैसे टेल्को, गोविंदपुर, घोड़ाबांधा, मानगो, कदमा, सोनारी, डिमना. यही सब जगह जहरीले सांप ज्यादा पाई जाती है. यदि किसी भी एरिया से स्नेक रेस्क्यू का कॉल आता है तो छोटू की टीम तुरंत रेस्क्यू करने के लिए पहुंच जाती है और रेस्क्यू करके सुरक्षित दालमा के फॉरेस्ट में रिलीज कर दिया जाता है. छोटू ने लोगों को यह सलाह दी है कि कभी आपके घर सांप ना घुसे, उसके लिए उपाय किये जाने की जरूरत है. लोगों को आधा लीटर मिट्टी का तेल, ब्लैक फिनाइल, 4 लीटर पानी, यह तीनों को मिलाकर सप्ताह में दस दिन में एक बार घर के चारों तरफ छिड़काव करें सांप वहां नहीं आएगा. घर के अगल-बगल कूड़ा कचरा ना रखें. जूता चप्पल चेक करके पहने क्योंकि अभी बरसात का मौसम है. (नीचे भी पढ़ें)

बरसात में ज्यादातर सांप निकलते हैं. छोटू से यदि कुछ सांपों की जानकारी आपको प्राप्त करनी है तो उनका व्हाट्सएप नंबर 9006138085 यह उनका व्हाट्सएप नंबर है. लॉकडाउन में जब ज्यादातर लोग घरों में थे और अस्पतालों में जगह की घोर कमी रही. छोटू ने महत्वपूर्ण भूमिका करोना के पहले और दूसरे वेभ के दौरान निभायी. छोटू और उनकी टीम ने सक्रियता दिखाते हुए कई लोगों को अस्पताल जाने से बचाया और उनकी जान की रक्षा की. छोटू यह भी बताते हैं कि सांप हमारा पर्यावरण मित्र है जैसे की सांप से हम लोगों को ऑक्सीजन मिलती है. खेत में चूहे अनाज नष्ट करते हैं तो सांपों चूहे को खाते हैं और अनाज बचाते हैं तो हम सब अनाज खाकर जिंदा रहते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
छोटू और उनकी टीम अपनी जान पर खेलकर दूसरों की जान बचाते हैं पर उनकी टीम को सरकार की तरफ से कोई सहायता अब तक नहीं मिली. जब उनकी टीम स्नेक रेस्क्यू के लिए कहीं जाती है तो रास्ते में ट्रैफिक पुलिस की परेशानी का भी सामना करना पड़ता है उनकी टीम को. उनकी टीम बहुत जगह आवेदन भी दे चुके है कि हमें और हमारा टीम को रास्ता में परेशानी ना हो एक आई कार्ड दे दी जाये. लेकिन सरकार, फॉरेस्ट, प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस किसी की तरफ से भी कोई सहायता अभी तक नहीं मिली है.



