नयी दिल्ली: बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही दोनों सदनों में बिहार एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में संविधान (103वां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किये. इसके बाद विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया और तीनों बिल वापस लेने की मांग करने लगे. गृह मंत्री अमित शाह ने पीएम, सीएम और मंत्रियों के 30 दिन से अधिक समय तक गिरफ्तारी की दशा में पद से हटाये जाने का प्रावधान करने वाले विधेयक सहित तीनों बिल जेपीसी को भेजे जाने का प्रस्ताव रखा. लेकिन विपक्षी सांसद हंगामा करते रहे. इस क्रम में कुछ सांसद वेल में आकर नारेबाजी करने लगे. कुछ विपक्षी सांसदों ने बिल की कॉपी फाड़ी और कागज के टुकड़े अमित शाह की तरफ उछाले.(नीचे भी पढ़े)
विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री का माइक मोड़ने की कोशिश की. सदन के अंदर स्थिति तनावपूर्ण हो गयी. इस क्रम में सत्ता पक्ष के कई सांसद, गृह मंत्री का बचाव करने आगे आये और विपक्षी सांसदों को रोकने की कोशिश की.अमित शाह ने विपक्ष के आरोप पर कहा कि मैं जब झूठे मामले में जेल गया था, तब नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा देकर गया था. हम इतने निर्लज्ज नहीं हैं. मैं चाहता हूं कि नैतिकता का मूल्य बढ़ना चाहिए. विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही बार बार स्थगित करना पड़ी. अंतत : लोकसभा तीन बजे तक स्थगित कर दी गयी है. उधर राज्य सभा भी स्थगित कर दी गयी. कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि मूल बात यह है कि तीनों विधेयक भारत के संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ हैं. भारत का संविधान, कानून का नियम कहता है कि जब तक आप दोषी साबित न हो जायें, तब तक आप निर्दोष हैं. (नीचे भी पढ़े)
यह संविधान के मूल ढांचे के लिए विनाशकारी है, क्योंकि राज्य के साधनों के दुरुपयोग की इसकी क्षमता बहुत अधिक है. यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है.असदुद्दीन ओवैसी ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 और संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025 को पेश किये जाने का विरोध किया. जम्मू-कश्मीर वाले विधेयक पर कहा कि यह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करता है और सरकार चुनने के अधिकार को कमजोर करता है. दूसरे बिल को लेकर कहा कि यह कार्यकारी एजेंसियों को तुच्छ आरोपों और संदेह के आधार पर न्यायाधीश और जल्लाद बनने की खुली छूट देता है. आरोप लगाया कि यह सरकार पुलिस राज्य बनाने पर तुली हुई है. यह निर्वाचित सरकार के लिए मौत की कील होगी. इस देश को पुलिस राज्य में बदलने के लिए भारत के संविधान में संशोधन किया जा रहा है.











