जमशेदपुर : झारखंड ट्रांसजेडर वेलफेयर बोर्ड की निष्क्रियता को लेकर झारखंड के ट्रांसजेंडर समुदाय में नाराजगी है. उनका कहना है कि बहुत मुश्किलों के बाद झारखंड मे ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड का गठन हुआ, किन्तु विगत दो वर्षों में बोर्ड की एक भी बैठक नहीं हुई है. वर्ष 2014 में नालसा जजमेंट ने सभी राज्य सरकारों को ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के गठन के आदेश दिये थे. पर झारखंड में इसके लिए कभी सोचा ही नहीं गया. उत्थान संस्था से अमरजीत नंद गिरि द्वारा रांची हाईकोर्ट में पीआइएल दर्ज कराये जाने के बाद कोर्ट के आदेश के बाद ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड का गठन हुआ, लेकिन वह आज तक सिर्फ कागजों तक ही सीमित है, क्योंकि आज तक उसकी एक भी बैठक नहीं हुई. वेल्फेयर बोर्ड के साथ ही सभी जिलों में ट्रांसजेंडर सेल भी बनने थे, जहां ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ हर महीने बैठक होनी थी. बैठक तो दूर कई जिलों में सेल तक नहीं बना. (नीचे भी पढ़ें)

उनकी शिकायत है कि क्या समुदाय इसी तरह हमेशा निराश होता रहेगा और अपने अधिकारों के लिए लड़ता रहेगा. सिर्फ कागजों तक ही अधिकार सीमित रह जाएंगे. धनबाद से सुनैना किन्नर, जो कि ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की सदस्य हैं, उनका कहना है कि उनको किसी तरह की कोई भी सुविधा नहीं मिली. बोर्ड में आने के बाद किसी बैठक में भी नहीं बुलाया गया. उन्होंने कहा कि उन्होंने आइ कार्ड की बात रखी कि आइ कार्ड मुहैया कराया जाए, साथ ही आने-जाने में हो रही असुविधा को देखते हुए उन्हें सहयोग मिले, किन्तु इस पर एक बार विचार भी नहीं किया गया. बोर्ड की सदस्य अमरजीत नंद गिरि का कहना है कि ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड गठित हुआ, परंतु उसका कार्यालय कहां है. वे बार-बार मंत्रालय जाते हैं, पर कोई उनकी बात भी नहीं सुनता. (नीचे भी पढ़ें)
जहां एक तरफ ट्रांसजेंडर समुदाय की उन्नति की बात की जाती है, वहीं इस तरह के कार्य झारखंड में होना बहुत ही शर्मिंदगी की बात है, क्योंकि जब तक ट्रांसजेंडर वेल्फेयर बोर्ड कार्य नहीं करेगा, तब तक ट्रांसजेंडर समुदाय का उत्थान नहीं होगा. बाकी राज्यों में कितना विकास हो रहा है, आवास योजना, सामुदायिक भवन और यहां तक कि पुलिस में ट्रांसजेंडर समुदाय की नियुक्तियां भी की जा रही हैं. उन्होंने झारखंड सरकार से इस पर विस्तार से ध्यान देने की गुहार लगाई, तभी जाकर ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान मिल पाएगा.







