रांची : झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान द्वारा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग एवं केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के समक्ष उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र सरकार ने संज्ञान लेना प्रारंभ कर दिया है. हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय बैठक के दौरान हिदायतुल्लाह खान ने झारखंड सहित देशभर के अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया था तथा केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग को मांगों से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था. अब केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन (ऑफिस मेमोरेंडम) के माध्यम से संबंधित विभागों एवं संस्थानों को इन मामलों में आवश्यक कार्रवाई करने तथा प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है. इससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में झारखंड के अल्पसंख्यक समुदाय को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं और अधिकार प्राप्त हो सकते हैं. (नीचे भी पढ़े)

हिदायतुल्लाह खान ने मांग की थी कि कोविड-19 महामारी के बाद से बंद रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे से जेद्दा (सऊदी अरब) के लिए हज उड़ानों का संचालन पुनः प्रारंभ किया जाए. वर्तमान में झारखंड के हज यात्री कोलकाता के माध्यम से यात्रा करने के लिए विवश हैं, जिससे उन्हें आर्थिक, शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. यदि इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो राज्य के हजारों हज यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी. ज्ञापन में सीबीएसई विद्यालयों में कक्षा 6 से 10 तक के उर्दू भाषी विद्यार्थियों के लिए उर्दू को तृतीय भाषा के रूप में शामिल करने की मांग भी की गई थी. केंद्रीय सरकार द्वारा संबंधित विभागों को पत्र भेजे जाने के बाद इस दिशा में आगे बढ़ने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं. प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के अंतर्गत अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल इंस्पेक्शन) कराने तथा बजट उपयोग की समीक्षा करने की मांग भी की गई थी. (नीचे भी पढ़े)
इससे योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित होने की उम्मीद है. राज्य स्तर पर प्रधानमंत्री के नवीन 15 सूत्री कार्यक्रम की निगरानी एवं उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित समितियों के नियमों के अनुपालन संबंधी दिशा-निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया गया था. इससे अल्पसंख्यकों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी और प्रभावशीलता में वृद्धि हो सकती है. विभिन्न राज्यों में बुलडोजर कार्रवाई तथा अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों के घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए हिदायतुल्लाह खान ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग की थी. इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है. अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा संचालित विद्यालयों को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान का दर्जा प्रदान करने की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई थी. (नीचे भी पढ़े)
इससे झारखंड के अनेक शैक्षणिक संस्थानों को लाभ मिलने की संभावना है. ज्ञापन में संविधान तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए यह भी मांग की गई है कि विद्यार्थियों को हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू तथा अन्य मातृभाषाओं में शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार की प्रभावी गारंटी सुनिश्चित की जाए. झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष द्वारा भेजे गए पत्र के संदर्भ में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 11 जून 2026 को जारी एक कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से संबंधित विभागों एवं संस्थानों को आवश्यक कार्रवाई करने तथा झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग को सीधे सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. इस संबंध में झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल मांगें उठाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि अल्पसंख्यक समुदाय को उनके संवैधानिक अधिकार और सुविधाएं प्राप्त हों. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार और संबंधित विभाग सकारात्मक कदम उठाएंगे, जिससे भविष्य में झारखंड के लाखों अल्पसंख्यक नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा. उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि झारखंड के अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों, शिक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके सकारात्मक परिणाम शीघ्र ही देखने को मिल सकते हैं.







