जमशेदपुर:आंध्र भक्त श्री राम मंदिरम्, बिष्टुपुर में आयोजित 57वें श्री वेंकटेश्वर स्वामी ब्रह्मोत्सवम् का सातवां दिवस मंगलवार को दक्षिण भारतीय वैदिक परंपरा एवं पाञ्चरात्र आगम शास्त्र के अनुसार अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ. पूरे दिन मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, नादस्वरम् एवं मंगल वाद्यों की मधुर ध्वनि तथा श्रद्धालुओं के “गोविंदा-गोविंदा” जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा.प्रातःकाल भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी का सुप्रभातम् एवं नित्यकटला पूजा संपन्न हुई. इसके उपरांत आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भगवान का महाअभिषेकम् कराया. पंचामृत, पवित्र तीर्थजल, चंदन, सुगंधित द्रव्यों एवं पुष्पों से भगवान का अभिषेक कर विश्व शांति, मानव कल्याण एवं भक्तों के सुख-समृद्धि की मंगलकामना की गई. इसके बाद भगवान का स्वर्णाभूषणों, रत्नजड़ित आभूषणों एवं मनोहारी पुष्पमालाओं से दिव्य श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया.(नीचे भी पढ़े)
सायंकाल भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी दिव्य गज वाहन पर विराजमान होकर भव्य नगर भ्रमण के लिए निकले. शोभायात्रा आंध्र भक्त श्री राम मंदिरम्, बिष्टुपुर से प्रारंभ होकर टेल्को स्थित गणेश मंदिर पहुंची, जहां मार्ग के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारी, पुष्पवर्षा की तथा नारियल, फल एवं पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया. भक्तों ने पूरे मार्ग में “गोविंदा गोविंदा”, “वेंकटेश्वर स्वामी की जय” के उद्घोष से वातावरण को भक्तिमय बना दिया. गज वाहन का आध्यात्मिक महत्व ब्रह्मोत्सवम् में गज वाहन सेवा का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है. गज अर्थात हाथी राजवैभव, शक्ति, धैर्य, बुद्धिमत्ता, ऐश्वर्य एवं समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस दिव्य वाहन पर भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी का विराजमान होना इस बात का प्रतीक है कि भगवान अपने भक्तों के जीवन से समस्त विघ्न-बाधाओं का निवारण कर उन्हें सुख, समृद्धि, वैभव एवं मंगलमय जीवन का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि गज वाहन पर भगवान के दर्शन करने से जीवन में स्थिरता, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है. मंदिर प्रबंधन समिति ने बताया कि 57वें ब्रह्मोत्सवम् के आगामी कार्यक्रम भी निर्धारित तिथि के अनुसार संपन्न होंगे तथा अधिकाधिक श्रद्धालुओं से इस दिव्य महोत्सव में भाग लेकर भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी का आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया गया.







