जमशेदपुर : केंद्र सरकार के खान एवं खनिज ( विकास एवं विनियम) संशोधन अधिनियम 2026 (एमएमडीआर संशोधन विधेयक) के विरोध में शनिवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार झामुमो पटमदा व बोड़ाम प्रखंड मुख्यालय में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. झामुमो पटमदा प्रखंड अध्यक्ष अश्विनी महतो व बोड़ाम प्रखंड अध्यक्ष दीपंकर महतो की अध्यक्षता में दोनों प्रखंडों में आयोजित धरना प्रदर्शन कार्यक्रम में सभी 27 पंचायतों से हजारों की संख्या में पार्टी के नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए और बिल के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. मुख्य अतिथि के रूप में दोनों प्रखंडों में विधायक मंगल कालिंदी शामिल हुए. पटमदा में धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए विधायक ने कहा कि एमएमडीआर कानून झारखंड के हक और अधिकारों को छीनने वाला काला कानून है. (नीचे भी पढ़ें)

इसके तहत केंद्र सरकार ने राज्यों के खनिज अधिकारों और भूमि पर कर लगाने के अधिकारों को सीमित किया है, जिसका विरोध झामुमो तब तक करेगी जब तक इस काला कानून को केंद्र सरकार वापस नहीं ले लेती है. उन्होंने कहा कि इसके विरुद्ध सड़क से सदन तक मजबूती के साथ आंदोलन किया जाएगा. जरूरत पड़े तो नाकाबंदी भी किया जाएगा. उन्होंने कहा कि झारखंड मे बीजेपी आजसू ने 17 साल तक राज किया लेकिन वृद्धा पेंशन के लिए लोग दौड़ते रहे, लेकिन हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री का पद संभालते ही सभी बुजुर्गों को पैंशन दिलाने का काम किया. केंद्र सरकार झारखंड की खनिज संपदा को दिल्ली और गुजरात ले जाना चाहते हैं जिसे सफल होने नहीं देंगे. विधायक ने कहा कि अभी देश में महंगाई चरम पर है. 300 रुपए में मिलने वाले गैस सिलेंडर अब लोग एक हजार रुपए में खरीद रहे हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन युवाओं को रोजगार देने का काम कर रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)
केंद्र सरकार विकास को बाधित करने ने के लिए इस तरह काला कानून लागू कर रही है. हाथ में तख्तियां लेकर कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी भी की. इस दौरान बीडीओ के हाथों में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया. पटमदा में धरना प्रदर्शन कार्यक्रम में झामुमो नेता महावीर मुर्मू, सागेन पूर्ति, सुभाष कर्मकार, अश्विनी महतो, हरिहर सिंह, जितुलाल मुर्मू, जामीनी प्रमाणिक , सिजेन हेंब्रम, सनत बेसरा आदि उपस्थित थे. जबकि बोड़ाम प्रखंड में झामुमो नेता प्रमोद लाल, मानिक महतो, दीपंकर महतो, काजल सिंह, छुटूलाल हांसदा, विनय मंडल समेत हजारों कार्यकर्ता मौजूद थे.




