लंदन : घरों की छतों पर सोलर पैनल के जरिए बिजली बनाना जल्द बीते कल की बात हो जाएगा क्योंकि ऐसी तकनीक बना ली गई है, जो कमरों की दीवारों पर लगकर हवा की नमी से बिजली पैदा कर सकते हैं. दरअसल बिंघम्टन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने ऐसा वॉलपेपर बनाया है, जो बिजली बनाता है. इसके लिए कमरे में मौजूद नमी का इस्तेमाल किया जाएगा. खास बात यह है कि इस तकनीक को काम करने के लिए न ही धूप की जरूरत होगी और न किसी अलग पावर सोर्स की. खाना पकाने, नहाने या हमारी सांसों से हवा में मिलने वाली नमी से भी ये वॉलपेपर बिजली बना पाएगा, जिसकी मदद से घर के कई छोटे गैजेट्स को चलाया जा सकेगा. (नीचे भी पढ़ें)

यह वॉलपेपर बेहद छोटे मॉइस्ट-इलेक्ट्रिक जेनरेटर्स के आधार पर काम करता है. यह सिस्टम हवा में मौजूद नमी को अपनी ओर सोखता है. ऐसा होने पर जब नमी कागज तक पहुंचती है, वह उनमें मौजूद आयन्स को अलग कर देता है. इससे कागज के अगले और पिछले हिस्से पर लगातार वोल्टेज का प्रवाह बना रहा है. यह तकनीक सोलर पैनल या विंडमिल के मुकाबले भी ज्यादा काम की है, क्योंकि बाहर के मौसम के मुकाबले घर के अंदर नमी का स्तर 30 से 60 प्रतिशत तक बना रहता है. इससे यह तकनीक बिना रुके बिजली जेनरेट करती रहती है. (नीचे भी पढ़ें)

इस टेक्नोलॉजी को दीवारों पर लगने लायक बनाने के लिए रिसर्चर्स ने पेपरट्रॉनिक्स तकनीक का इस्तेमाल किया है. इसमें कागज पर सीधे इलेक्ट्रिक सर्किट प्रिंट नहीं किया जाता. इसके लिए कागज के बाहरी किनारों पर ग्लिसरॉल लगाया जाता है. इसका काम हवा से नमी को सोखना होता है. इसके बीच में एक पॉलीमर की परत लगाई जाती है, जो नमी को भाप बनकर उड़ने से रोकती है. इससे नमी का बहाव एक तय दिशा में लगातार बहता रहता है. दीवारों की खूबसूरती को खराब होने से रोकने के लिए वायरिंग कनेक्शन वॉलपेपर के पीछे की तरफ छिपाए जाते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
रिसर्चर्स ने 1,596 इंटरकनेक्टेड यूनिट्स वाले एक बड़े वॉलपेपर की सफल टेस्टिंग की है. 80 प्रतिशत नमी पर एक वॉलपेपर 0.34 वोल्ट और 2.2 माइक्रोवॉट बिजली दे पाता है. इसकी मदद से एक वायरलेस कीबोर्ड को सफल तौर पर चलाकर देखा गया. ऐसे में इस तकनीक से छोटे डिवाइसेज आराम से चलाए जा सकेंगे. लेकिन इससे फ्रिज या एसी जैसे डिवाइस नहीं चल पाएंगे.




