नई दिल्ली : यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआइ) के जरिये 2000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (डीएमआर) लागू करने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है. नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआइ) के बयान के मुताबिक, यह चार्ज अब दिवाली के बाद लागू किया जाएगा. इससे कारोबारियों को पेमेंट सर्विस से जुड़े लोगों को फिलहाल राहत मिलेगी. यह निर्णय त्योहारी सीजन के ठीक पहले आया है, जब डिजिटल भुगतान में आम तौर पर बढ़ोतरी देखी जाती है. नया एमडीआर ढांचा पहले 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होनेवाला था. एक रिपोर्ट के अनुसार एनपीसीआइ ने एक बयान में कहा है कि इस देरी का निर्णय त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और यह फीस हिंदू त्योहारों के ठीक बाद किसी ऐसी तारीख से लागू की जाएगी, जिसकी जानकारी अलग से दी जाएगी. (नीचे भी पढ़ें)

ध्यान रहे कि दिवाली (जो पूरे भारत में इस वर्ष 8 नवंबर को मनाई जाएगी) आम तौर पर एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में ग्राहकों के खर्च का सबसे बड़ा समय होता है, जब लोग कार, कपड़े और घरेलू उपकरण जैसी चीजों की खरीददारी करते हैं. प्रस्तावित फीस, जिससे देश में छह साल से अधिक समय से चल रहे जीरो कॉस्ट यूपीआइ पेमेंट का दौर खत्म हो जाता, उसका रिटेलर्स ने विरोध किया था. (नीचे भी पढ़ें)
यूपीआइ का उपयोग 50 करोड़ से अधिक लोग चाय से लेकर आइफोन तक हर चीज खरीदने के लिए करते हैं. विगत अगस्त माह में यूपीआइ ट्रांजैक्शन की वैल्यू के हिसाब से वॉलमार्ट के फोन पे और अल्फाबेट के गूगल पे की मार्केट हिस्सेदारी लगभग 80 फीसदी थी. यह फीस भारत के सालाना त्योहारी सीजन के दौरान लागू होनेवाली थी, जो अक्टूबर से दिसंबर तक चलता है और जिसमें आम तौर पर ग्राहकों के खर्च में तेजी आती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि फीस लागू करने में देरी से पेमेंट कंपनियों को अपने सिस्टम को अपग्रेड करने और ग्राहकों पर लागत का बोझ न डालने का मौका मिल सकता है, साथ ही त्योहारी सीजन के दौरान रिटेलर्स को आनेवाली दिक्कतों को भी दूर किया जा सकेगा.





