जमशेदपुर : विजयादशमी के मौके पर भगवान हनुमान के वेश में मौजूद एक युवक द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का पैर छूने का मामला राजनीतिक रंग ले चुका है. यह मामला सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर विरोध और समर्थन को लेकर लोग आमने सामने हो चुके है. एक ओर जहां इसको बजरंगबलि की तौहीन बताया जा रहा है. वहीं, रघुवर दास के समर्थकों का कहना है कि उक्त युवक भाजपा कार्यकर्ता है, जो बजरंगबलि बना है. रघुवर राम जी को कहते है, इस कारण भाजपा कार्यकर्ता ने अपने रघुवर का पैर छूकर प्रणाम किया है, जिस कारण इसमें कोई गलत नहीं है. वहीं, कांग्रेस समेत तमाम दलों ने इसको अहंकार से जोड़कर देखा है. पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष परविंदर सिंह ने प्रेस बयान जारी कर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा विजयादशमी के अवसर पर आयोजित झांकी में भगवान हनुमान के वेश में उपस्थित एक बालक से अपने पैर छूने की घटना पर गहरी आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि यह घटना धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और मर्यादाओं के प्रति संवेदनशीलता की कमी को दर्शाती है. धर्म और आस्था से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्तियों को विशेष सावधानी और मर्यादा का परिचय देना चाहिए. परविंदर सिंह ने कहा कि सनातन धर्म में भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति, सेवा, समर्पण और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है. (नीचे भी पढ़े)
धार्मिक आयोजनों में भगवान के स्वरूप धारण करने वाले कलाकारों और बच्चों के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान का भाव रखना हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. ऐसे में भगवान हनुमान का वेश धारण किए हुए एक बालक से अपने पैर छूने देना अनेक श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है. सार्वजनिक मंच पर घटित ऐसी घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता बरतना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की निजी सोच से ऊपर है. धर्म और संस्कृति के नाम पर राजनीति करने वालों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे अपने आचरण से धार्मिक मर्यादाओं तथा सामाजिक सद्भाव का उदाहरण प्रस्तुत करें. भारतीय संस्कृति हमें प्रत्येक देवी-देवता के स्वरूप का सम्मान करना और धार्मिक भावनाओं की कद्र करना सिखाती है. परविंदर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी से भी आग्रह किया कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर जिम्मेदार रवैया अपनाए. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करते हुए क्षमा मांगने की मांग की, ताकि इस घटना से आहत श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान हो सके और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो. उन्होंने कहा कि धर्म और आस्था का सम्मान केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे व्यक्ति के व्यवहार और आचरण में भी दिखाई देना चाहिए. किसी भी धर्म की परंपराओं और मान्यताओं के प्रति असंवेदनशीलता समाज में अनावश्यक विवाद और असंतोष पैदा कर सकती है इसलिए सभी राजनीतिक दलों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों को धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए समाज में आपसी सम्मान, सद्भाव और एकता बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए.





