
नयी दिल्ली : भाजपा के पूर्व नेता और देश के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने नयी दिल्ली के महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट पर सोमवार की दोपहर धरना दिया. धरना देने के दौरान उन्होंने प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को उठाया और प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के नीति व नियत पर सवाल उठाये. 20 लाख रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद पांच दिन तक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारण के प्रेस कांफ्रेंस पर ट्विट करते हुए कहा कि चलो आखिरकार ‘निर्मला सीरियल’ अब खत्म हुआ. इस बीच वे धरना के माध्यम से यह कहा कि देश में लॉकडाउन के दौरान 50 दिनों से ज्यादा का समय केंद्र सरकार को मिला, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से किसी तरह का कोई ठोस रणनीति नहीं बनायी गयी. इसमें नीति और नियत का साफ तौर पर अभाव दिखा. श्री सिन्हा के साथ उनके सहयोगियों ने भी राजघाट पर धरना दिया और कहा कि प्रवासी मजदूरों के साथ अमानवीयता हो रहा है और हम लोग चुप से अपने घरों में नहीं बैठ सकते है. इसको लेकर केंद्र सरकार की पूरी तरह फेल्योर है. बिहार, झारखंड, ओड़िशा, बंगाल, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के मजदूरों के साथ केंद्र सरकार अन्याय कर रही है, जिसको किसी भी हाल पर बरदाश्त नहीं किया जा सकता है. यह पाप है और इस पाप से बचने के लिए केंद्र सरकार को राज्यों के साथ मिलकर उनको गाड़ी उपलब्ध कराकर सेफ्टी के साथ घर भेजने का उपाय किया जाना चाहिए. केंद्र सरकार राज्यों पर सारा मामला फेंककर अपने को बचाने की कोशिश कर रही है, जो सरासर गलत है. यशवंत सिन्हा ने अपील की है कि केंद्र सरकार गरीबों को पर्याप्त मात्रा में भोजन और पैसे दें, जिसके लिए राज्यों को साथ लेना चाहिए. मजदूरों को कम से कम तीन माह का वेतन का इंतजाम करते हुए उनके भरण-पोषण की व्यवसथा की जाये. सेना का इस्तेमाल ऐसे ही संकट की घड़ियों में किया जाता है. सेना के विमानों का इस्तेमाल जब फूल बरसाने के लिए किया जा सकता है तो सेना को मजदूरों को घर भेजने के लिए इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकती है. लोगों की जानें सड़कों पर जा रही है और केंद्र की मोदी सरकार चुपचाप बैठकर देख रही है. आखिर राज्यों के पास तो सेना का अधिकार या अर्धसैनिक बलों के कमांड का अधिकार नहीं है. ऐसे में केंद्र सरकार खुद से आगे आकर इस दिशा में सेना का इस्तेमाल कर सकती है.














