शार्प भारत डेस्क : दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है जो कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. वैसे इस त्योहार की शुरुआत धनतेरस से ही हो जाती है और समापन भाईदूज के दिन होता है. यानी दिवाली एक दिन का त्योहार नहीं है बल्कि ये पांच दिन तक चलने वाला महापर्व है. दिवाली के शुभ अवसर पर लोग माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, राम दरबार और कुबेर देवता की पूजा करते हैं और रात में अपने घरों में दीपक जलाते हैं. ऐसी मान्यता है जो कोई दिवाली के दिन शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन करता है उसके घर में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहती है. चलिए अब जानते हैं दिवाली पर मां लक्ष्मी और मां काली की पूजा का समय. (नीचे भी पढ़ें)
दीपावली पर इस समय करें मां लक्ष्मी की पूजा : साल 2026 में दिवाली का त्योहार 8 नवंबर रविवार को मनाया जाएगा. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है. महावीर पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. प्रदोष काल और रात में अमावस्या तिथि होने के कारण दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी. दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा के लिए शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 7 बजकर 55 मिनट तक वृषभ लग्न रहेगा. इसे स्थिर लग्न माना जाता है. वहीं, प्रदोष काल शाम 5 बजकर 28 मिनट से रात 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है. (नीचे भी पढ़ें)
मां काली की पूजा का समय : दिवाली की रात मां काली की पूजा करने की भी परंपरा है. खासकर पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में काली पूजा का विशेष महत्व है. इस बार रात में मां काली की पूजा के लिए स्थिर लग्न उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है. ऐसे में निशीथ काल को ध्यान में रखते हुए रात 11 बजकर 35 मिनट से 12 बजकर 7 मिनट के बीच पूजा शुरू की जा सकती है.












