
राजन सिंह
चाकुलिया : कोरोना संक्रमण के कारण रोजाना मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों के समक्ष भुखमरी कि स्थिति उत्पन्न हो गयी है. चाकुलिया के स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक के बगल में पेड़ के नीचे रह कर 10 लोग किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं. पेड़ के नीचे कोलबादिया गांव निवासी फुलमनी सोरेन, निमाई गोप, सलमा हांसदा, पार्वती मुर्मू, समेत अन्य पेड़ के नीचे रात गुजार रहे हैं. पेड़ के नीचे रह रही महिला और वृद्धा ने बताया कि कोरोना के पूर्व वे रोज ट्रेन से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर उनके द्वारा निर्मित सामग्रियों को बेचकर परिवार का भरण-पोषण करती थीं, परंतु लाकडाउन होने से ट्रेनों और बसों का परिचालन बंद है. ऐसे में वे बेरोजगार हो गये हैं. उनके पास घर भी नहीं है. विगत तीन माह से सभी पेड़ के नीचे रह रही हैं.
उन्होंने बताया कि एक माह पूर्व प्रखंड कार्यालय से चावल मिला था वह भी समाप्त हो गया है. किसी तरह यहां-वहां मांगकर गुजर-बसर कर रही हैं. कोरोना के डर से लोग उन्हें भीख भी नहीं दे रहे हैं. कोरोना के इस दौर में उनके समक्ष परिवार का भरण-पोषण करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वे सभी पेड़ के नीचे टकटकी लगाए बैठी रहती है कि काश कोई व्यक्ति आये उनकी मदद के लिए. शाम होते ही उनकी आशा की किरण सूर्य की किरण के साथ ढ़ल जाती है और उनके हाथ निराशा ही आती है. उन्होंने कहा कि गर्मी में दिन और रात पेड़ के नीचे रह कर गुजार देती हैं, परंतु जब बरसात होती है तब वे सभी किसी की झोपड़ी में जाकर या बंद दुकान की बरामदे में बैठ कर रात गुजारती हैं.

कोलबादिया निवासी वृद्धा ट्रेन में सफर कर दातुन, झाड़ू बेच करती थी गुजारा, लॉकडाउन ने किया बेरोजगार, गांव में नही आने दे रहे हैं ग्रामीण
कोरोना संक्रमण का खौफ लोगों में है. कोरोना का किस कदर लोगों में खौफ है यह चाकुलिया में देखने को मिल रहा है. कोरोना संक्रमण के कारण प्रखंड की लोधाशोली पंचायत के कोलबादिया गांव निवासी फूलमनी सोरेन (63) वृद्धा अपने गांव-घर नहीं जा पा रही हैं. वह पिछले तीन माह से चाकुलिया के नाया बाजार स्टेशन जाने वाली सड़क के किनारे रेलवे ट्रेक के बगल में एक इमली पेड़ के नीचे रात गुजार रही हैं. वृद्धा ने अपना दर्द सुनाते हुए कहा कि वह ट्रेन में सफर कर दातुन और झाड़ू बेचकर किसी तरह अपना जीवन-बसर कर रही थीं. कोरोना के कारण सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कर दी.
उन्होंने बताया कि लॉकडाउन होने से उसके समक्ष बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गई है और वह लॉकडाउन के समय से लेकर अब तक स्टेशन के पास इमली पेड़ के नीचे विगत तीन माह से रह रही हैं. एक दो बार प्रखंड कार्यालय से उन्हें चावल मिला था. उससे किसी तरह अब तक अपना पेट पालती रहीं. फिलहाल चावल समाप्त हो चुका है. वह पुन: चावल लेने के लिए प्रखंड कार्यालय गई थीं, परंतु चावल नही मिला. फिलहाल वह इधर-उधर मांग कर गुजर-बसर कर रही हैं. फूलमनी सोरेन ने कहा कि वर्षा होने पर वह रात में किसी झोपड़ी में जाकर रात गुजारती हैं. वह अपने गांव-घर लौटी थीं, परंतु ग्रामीणों ने उन्हें गांव में घुसने नहीं दिया. फूलमनी ने बताया कि ग्रामीणों ने उनसे कहा कि तुम बाजार में काम करती हो बाजार में ही रहो, बाजार से कोरोना बीमारी गांव में मत लाओ. यह कह कर ग्रामीणों ने उन्हें गांव से लौटा दिया, तब से वह चाकुलिया रेलवे स्टेशन के निकटस्थ इमली पेड़ के नीचे रह रही हैं.








