
जमशेदपुर : वर्षों से बंद पड़ी केबुल कंपनी (इंकैब) के 177 एकड़ जमीन के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय में दायर वाद संख्या सीएमपी 187/2020 पर सुनवाई हुई. ज्ञातव्य है कि इंकैब की 177 एकड़ जमीन को न्याय निर्णायक अधिकारी, एनसीएलटी, कोलकाता ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर टाटा स्टील का लीज घोषित कर दिया था. आज की सुनवाई की शुरुआत में ही एक अधिवक्ता अनुराग सिंह ने अदालत को बताया कि उसे इंकैब कंपनी के भूतपूर्व परिसमापक शशि अग्रवाल ने इस मामले के लिए अधिकृत किया था और उन्हें नये रिजोल्यूशन प्रोफेशनल ने भी अधिकृत किया है. इस पर कर्मचारियों के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने आपत्ति करते हुए कहा कि एनसीएलएटी ने अपने 4 जून 2021 के अंतिम आदेश में पूर्व परिसमापक शशि अग्रवाल को धोखेबाज करार दिया है और भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड से उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कारवाई करने की भी अनुशंसा की है. अतः वह अधिकार रद्द हो गया और नये रिजोल्यूशन प्रोफेशनल को इन्हें अधिकृत करने का अधिकार ही नहीं है. नये रिजोल्यूशन प्रोफेशनल को लेनदारों के बकाये की मिलान करनी है और पहले लेनदारों की कमिटी बनानी है. लेनदारों की कमिटी नये अंतरिम रिजोल्यूशन प्रोफेशनल को रिजोल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त करेगी. किसी नये अधिवक्ता को रिजोल्यूशन प्रोफेशनल लेनदारों की कमिटी के प्रस्ताव के बाद ही अधिकृत कर सकता है. अतः इन्हें इंकैब कंपनी के तरफ से इस सुनवाई में भाग लेने का अधिकार नहीं है. हालांकि इसके बाद भी वह अधिवक्ता पूरी सुनवाई के दौरान बोलता रहा और उसने पूरी कोशिश की कि आज की सुनवाई न हो सके. कर्मचारियों के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि एनसीएलएटी ने न्याय निर्णायक अधिकारी, एनसीएलटी, कोलकाता के इंकैब के परिसमापन के 7 फरवरी 2020 के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है पर झारखंड उच्च न्यायालय में दायर वाद संख्या सीएमपी 187/2020 को ध्यान में रखकर इंकैब की जमीन के मामले में कोई व्यवस्था नहीं दी है. पर, अदालत ने कर्मचारियों के अधिवक्ता को इस संदर्भ में एक हलफनामा दायर करने का आदेश दिया तथा इसके साथ अधिवक्ता अनुराग सिंह को अपने अधिकृत होने का प्रमाण रजिस्ट्री में दाखिल करने को कहा. अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद मुकर्रर की गयी है. शुक्रवार को हुई सुनवाई में अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, रोहित सिन्हा और आकाश शर्मा ने हिस्सा लिया. कर्मचारियों के प्रतिनिधि भगवती सिंह ने बताया कि अगर नये रिजोल्यूशन प्रोफेशनल ने गैरकानूनी ढंग से किसी अधिवक्ता को अधिकृत किया है तो वे इसे भी हटाने के लिए न्याय निर्णायक अधिकारी, एनसीएलटी, कोलकाता में याचिका/ अर्जी दायर करेंगे.







