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adityapur-bsnl-अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा बीएसएनएल, उपभोक्ता परेशान, कहीं बीएसएनएल के बंदी का कारण आदित्यपुर में की जा रही इस तरह की लापरवाही तो नहीं

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सरायकेला : एक जमाना था कि बीएसएनएन देश की सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी थी. आज वो दौर नहीं रहा. आज बीएसएनएल दौड़ में कही भी नहीं है. उसका कारण किसी से छिपा नहीं है. इसके लिए सरकार जिम्मेवार है, या विभागीय अधिकारियों की असंवेदनशीलता ये आप तय करें. फिलहाल बीएसएनएल इतिहास के पन्नों का हिस्सा बनने से कुछ ही दूरी के सफर पर खड़ा है. देशभर मेे लाखों कर्मचारियों को जबरन वीआरएस देकर काम से बैठा दिया गया. लगभग सभी सर्किलों में कर्मचारियों की घोर किल्लत उसके बाद सारा काम ठेकेदार और ठेका कर्मियों के भरोसे छोड़ कब्र में भेजने से पहले बीएसएनएम के ताबूत में आखिरी कील ठोकने की तैयारी चल रही है. वहीं सेवानिवृत कर्मियों को भी विभाग ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है. जहां पिछले एक साल से उन्हें मेडिकल अलाउंस नहीं दिया जा रहा है. साथ ही जितने भी निजी अस्पतालों से टाइअप था, सभी से एग्रीमेंट समाप्त कर दिया गया है. कारण पूछने पर विभाग के घाटे में होने की दुहाई दी जा रही है. वैसे जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों की अगर बात करें तो बीएसएनएल को लोग भूल चुके हैं. न तो इसका मोबाईल नेटवर्क सही से काम करता है, न ही इंटरनेट. वहीं विभाके जीएम बड़े- बड़े दावे करते नजर आते हैं. वैसे लैंडलाईन कनेक्शन की अगर हम बात करें तो पूरे जमशेदपुर सर्किल में लगभग 28 हजार लैंडलाईन उपभोक्ता हैं. वहीं टाटा कमांड एरिया छोड़ बाकी इलाकों मानगो, परसुडीह और आदित्यपुक के उपभोक्ताओं को विभाग द्वारा नियमित सुविधा नहीं मिल पा रहा है. आदित्यपुर कॉलोनी में करीब 7 सौ उपभोक्ताओं का लैंडलाइन कनेक्शन पिछले सात महीनों से पूरी तरह से ठप्प पड़ा हुआ है. कुछ एक को छोड़कर. बताया जा रहा है कि सड़क और नालियों के कटाव के कारण अंडरग्राउंड केबुल जहां- तहां उजाड़ दिया गया है. वहीं इस संबंध में जीएम का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं कि कितना कनेक्शन फिलहाल प्रयोग में है. वहीं इसके पीछे उन्होंने जो कारण बताया वो हैरान करनेवाला है. उन्होंने बताया कि टाटा कमांड एरिया में विभाग के साथ सामंज्य बनाकर सड़कों का चौड़ीकर या नालियों की खुदाई की जाती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में राज्य सरकार के अलगृ अलग विभाग काम करती है, और जहां- तहां केबुल छतिग्रस्त कर छोड़ जाते हैं. अब जरा सोचिए भारत सरकार का उपक्रम आप आपसे बगैर अनुमति कोई विभाग कैसे आपके केबुल को छतिग्रस्त करते चला जाए और आप अपने उपभोक्ताओं के लिए अपने नुसकसान के साथ समझौता कर सकते हैं. वहीं सूत्रों की अगर माने तो इसके पीछे कर्मचारियों की कमी को कारण माना जा रहा है. यानी कहीं न कहीं सरकार और विभाग का मंशा साफ है, कि सुनियोजित तरीके से बीएसएनएल को नीलाम करने की योजना पर काम किया जा रहा है. आपको याद दिला दें कि कभी बीएसएनएल नौ- रत्न कंपनियों में शुमार थी. आज बीएसएनएल नीलामी के लिए बाजार में उतरने की तैयारी में है, इसके लिए जिम्मेवार कौन है. आदित्यपुर इलाके में एक महीने के भीतर गली- गली जियो का ऑप्टीकल फाईबर केबुल बिछाने का का युद्धस्तर पर पूरा कर लिया गया. यहां तक कि अब जिओ उपभोक्ताओं को कनेक्शन लेने के लिए अपना प्लान भी बताना शुरू कर दिया है. लेकिन पिछले सात महीनों से 6 सौ कनेक्शन पूरी तरहा से ठप्प पड़ा हुआ है, इसको लेकर बीएसएनएल के अधिकारी और कर्मचारी द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

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