जमशेदपुर : परिसीमन को लेकर मोदी सरकार साजिश कर रही थी. यह साजिश नाकाम हो रही थी. यह बातें कांग्रेस के जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह और मानगो मेयर सुधा गुप्ता ने कहीं. दोनों ने संयुक्त रुप से बिष्टुपुर स्थइत तिलक पुस्तकालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. इस दौरान उनके साथ कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी राजीव मिश्रा भी मौजूद थे. संबोधित करते हुए सुधा गुप्ता मेयर मानगो ने कहा है कि संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में गिरने से परिसीमन को लेकर मोदी सरकार की साजिश नाकाम हो गई है और यह लोकतंत्र एवं संविधान की जीत है. विपक्ष की एकजुटता ने संघीय ढांचे को बदलने की सरकार की साजिश को नाकाम कर दिया है. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने-अपने भाषणों में कहा कि अगर विपक्ष इस मुद्दे पर सहमत नहीं होगा तो न कभी चुनाव जीत पाएगा, न ही सत्ता में आ पाएगा. इन बातों से ही साफ हो गया कि सरकार की मंशा क्या थी. भाजपा सरकार महिला आरक्षण के नाम पर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती थी. सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष इस बिल को पारित कर दे, ताकि उसे जाति के आंकड़ों के बिना मनमाने तरीके से परिसीमन का मौका मिल जाए. सरकार द्वारा जो साजिश रची गई, उसका उद्देश्य सत्ता हासिल करना था. उन्होंने कहा कि भाजपा खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती थी. उसने सोचा था कि यदि बिल पारित नहीं हुआ तो विपक्ष को महिला विरोधी बता दिया जाएगा और पारित हो जाएगा तो परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ उठा लिया जाएगा. जिलाध्यक्ष परविंदर सिंह ने कहा कि सरकार ने अचानक विधानसभा चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया और विधेयक का मसौदा आखिरी समय में सामने रखा, जिससे विपक्ष को पर्याप्त समय न मिले. (नीचे भी पढ़ें)
भाजपा के आरोपों से संबंधित एक सवाल के जवाब में जिलाध्यक्ष ने कहा कि महिला आरक्षण के लिए पूरा विपक्ष तैयार है. उन्होंने मांग की कि यदि मोदी सरकार गंभीर है, तो 2023 में सर्वसम्मति से पारित विधेयक को तुरंत लागू किया जाए. उन्होंने कहा कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों में से 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने के लिए विपक्ष पूरी तरह तैयार है. उन्हों ने कहा कि हम सब यह बार-बार कह रहे हैं कि जैसे अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण है, वैसे ही ओबीसी महिलाओं के लिए भी उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण होना चाहिए. पूरे देश ने देख लिया है कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो मोदी सरकार को कैसे हराया जा सकता है.जमशेदपुर : परिसीमन को लेकर मोदी सरकार साजिश कर रही थी. यह साजिश नाकाम हो रही थी. यह बातें कांग्रेस के जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह और मानगो मेयर सुधा गुप्ता ने कहीं. दोनों ने संयुक्त रुप से बिष्टुपुर स्थइत तिलक पुस्तकालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. इस दौरान उनके साथ कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी राजीव मिश्रा भी मौजूद थे. (नीचे भी पढ़ें)
संबोधित करते हुए सुधा गुप्ता मेयर मानगो ने कहा है कि संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में गिरने से परिसीमन को लेकर मोदी सरकार की साजिश नाकाम हो गई है और यह लोकतंत्र एवं संविधान की जीत है. विपक्ष की एकजुटता ने संघीय ढांचे को बदलने की सरकार की साजिश को नाकाम कर दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने-अपने भाषणों में कहा कि अगर विपक्ष इस मुद्दे पर सहमत नहीं होगा तो न कभी चुनाव जीत पाएगा, न ही सत्ता में आ पाएगा. इन बातों से ही साफ हो गया कि सरकार की मंशा क्या थी. भाजपा सरकार महिला आरक्षण के नाम पर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती थी. सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष इस बिल को पारित कर दे, ताकि उसे जाति के आंकड़ों के बिना मनमाने तरीके से परिसीमन का मौका मिल जाए. सरकार द्वारा जो साजिश रची गई, उसका उद्देश्य सत्ता हासिल करना था. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि भाजपा खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती थी. उसने सोचा था कि यदि बिल पारित नहीं हुआ तो विपक्ष को महिला विरोधी बता दिया जाएगा और पारित हो जाएगा तो परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ उठा लिया जाएगा. जिलाध्यक्ष परविंदर सिंह ने कहा कि सरकार ने अचानक विधानसभा चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया और विधेयक का मसौदा आखिरी समय में सामने रखा, जिससे विपक्ष को पर्याप्त समय न मिले. भाजपा के आरोपों से संबंधित एक सवाल के जवाब में जिलाध्यक्ष ने कहा कि महिला आरक्षण के लिए पूरा विपक्ष तैयार है. उन्होंने मांग की कि यदि मोदी सरकार गंभीर है, तो 2023 में सर्वसम्मति से पारित विधेयक को तुरंत लागू किया जाए. उन्होंने कहा कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों में से 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने के लिए विपक्ष पूरी तरह तैयार है. उन्हों ने कहा कि हम सब यह बार-बार कह रहे हैं कि जैसे अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण है, वैसे ही ओबीसी महिलाओं के लिए भी उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण होना चाहिए. पूरे देश ने देख लिया है कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो मोदी सरकार को कैसे हराया जा सकता है.



