
जमशेदपुर : देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों एवं विद्यार्थियों को संबंधित राज्यों तक भेजने का सिलसिला शुरू हो चुका है. इधर जमशेदपुर के उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंचकर जिला पुलिस पदाधिकारियों व रेलवे के पदाधिकारियों के साथ विचार विमर्श कर कई आवश्यक दिशा निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया. वहीं इस दौरान जिले के उपायुक्त ने बताया कि मजदूरों और छात्रों के लिए विशेष ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है ताकि उनको उनके आवास तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके. इसी कड़ी में भविष्य में अगर ट्रेनों का आवागमन टाटानगर रेलवे स्टेशन पर होता है तो ऐसे में यात्रियों को कम से कम असुविधा हो साथ ही वे पूरी तरह से सोशल डिस्टेंस का पालन करे.
इसको लेकर पुलिस पदाधिकारियों, रेलवे के अधिकारियों व रेलवे के सुरक्षा बलों के साथ मिलकर एक रणनीति तैयार की गई है. साथ ही सोशल डिस्टेंस को लेकर टाटानगर रेलवे स्टेशन में रेल प्रबंधन के द्वारा क्या कुछ तैयारी की गई है. इन गेट आउट गेट, पार्किंग की क्या व्यवस्था है ट्रेन के आने के बाद यात्रियों को उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचाने के लिए क्या कुछ सुविधा उपलब्ध कराई गई हैं इसकी समीक्षा की.
केंद्र सरकार के आदेश अनुसार झारखंड सरकार ने सबसे पहले पहल शुरू की और कोटा में फंसे विद्यार्थियों को लाने के लिए ट्रेन की मांग की थी. हालांकि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के इस आग्रह को स्वीकार करते हुए कोटा से विद्यार्थियों को झारखंड लाया गया है.

उधर रांची के हटिया स्टेशन पर सभी विद्यार्थी उतरेंगे और जिस जिस जिला के जो विद्यार्थी हैं उस जिला के उपायुक्त अपने स्तर से व्यवस्था कर उन्हें उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचाएंगे. वैसे पुलिस एवं जिला के 150 विद्यार्थी शनिवार की देर रात जमशेदपुर पहुंच रहे हैं. इन विद्यार्थियों के लाने की जिम्मेदारी उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने उठाया है. वैसे 10 बस इन विद्यार्थियों को हटिया स्टेशन से लाया जाएगा और पारडीह में रखा जाएगा. पहले इनका मेडिकल चेकअप होगा, उसके बाद गंतव्य स्थान के लिए रवाना किया जाएगा. वही बाहर से आए विद्यार्थी होम क्वॉरेंटाइन में रहेंगे. हालांकि बस को रवाना करने से पहले सैनिटाइजिंग कर बस को रवाना किया गया.
दूसरी ओर, अगर लॉकडाउन खुलता है तो बसों का परिचालन भी शुरू होगा. लेकिन बसों में यह नियम लगाया जा सकता है कि 50 फीसदी यात्रियों को ही बसों में बैठाया जाना है. इस लिहाज से बसों का परिचालन करना थोड़ा महंगा सौदा होगा. अगर जरूरत पड़ेगी तो बसों के परिचालन का भाड़ा बढ़ाया जा सकता है क्योंकि बसों में कम यात्री बैठाना होगा. सरकार के स्पष्ट गाइडलाइन का इंतजार सारे लोगों को है.














