जमशेदपुर : करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान में रविवार को आयोजित दिशोम बाहा महोत्सव में आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला. पूर्वी सिंहभूम ही नहीं, पूरे कोल्हान से आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में इस आयोजन में पहुंचे. सुबह से ही जाहेरथान परिसर में गहमा-गहमी का माहौल बना रहा, जो देर शाम तक जारी रहा. आयोजन स्थल पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान की खूबसूरत झलक पेश की. (नीचे भी पढ़ें)

पूजा-अर्चना के उपरांत नायके ने महिला – पुरुषों के बीच फूलों का वितरण किया. महिलाओं ने श्रद्धा स्वरूप फूलों को अपने जूड़े में सजाया, जबकि पुरुषों ने कान पर लगाया. इस परंपरा को शुभ और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. दिशोम बाहा की खास परंपरा के तहत नायके को मांदर की थाप और पारंपरिक नृत्य के साथ उनके घर तक पहुंचाया जाता है. इस दौरान युवाओं और बुजुर्गों ने सामूहिक नृत्य कर वातावरण को उल्लासमय बना दिया. मांदर की थाप और पारंपरिक गीतों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. कई स्थानों पर पानी से होली खेलने की परंपरा भी निभाई गई. (नीचे भी पढ़ें)

भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने करनडीह-सुंदरनगर मार्ग को रात 9 बजे तक बंद रखने का निर्णय लिया है. वाहनों को गोलपहाड़ी, परसुडीह और नामोटोला होते हुए सुंदरनगर की ओर डायवर्ट किया जा रहा है. आयोजन को लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.







