
जमशेदपुर : भारतीय जनतंत्र मोर्चा के केंद्रीय संगठन सचिव राकेश पाण्डेय ने एक बयान जारी कर राज्य सरकार पर भाषाई विरोधी होने का आरोप लगाया है। पिछले 5 अगस्त को राज्य कैबिनेट ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (जेपीएससी, एसएससी) आदि में 30 अंक की परीक्षा स्थानीय भाषा में देना अनिवार्य किया है। इसके तहत कल 12 स्थानीय भाषा को जोड़ा है जिसके तहत उर्दू, संथाली, बांग्ला, मुंडारी, हो, खड़िया, कुड़ुख, कुरमाली, खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया, उड़िया शामिल है। यानी झारखंड प्रतियोगिता परीक्षा में इन 12 भाषाओं में से किसी एक भाषा में 30 नंबर की परीक्षा देना अनिवार्य होगा। राकेश पांडे ने कहा है कि राज्य सरकार बताये कि उर्दू कब से स्थानीय भाषा हो गई। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि झारखंड की एक बड़ी जनसंख्या मगही और भोजपुरी और आंगिका बोलती है, जिसे राज्य सरकार ने अनिवार्य नहीं किया। राज्य सरकार का यह निर्णय मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषियों के खिलाफ है। (नीचे भी पढ़ें)
राकेश पाण्डेय ने कहा है कि भारतीय जनतंत्र मोर्चा इन भाषाओं को भी प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल कराने के लिय लोकतांत्रिक तरीकों से राज्य सरकार पर दबाव बनायेगी तथा झारखंड में लगभग 40 लाख लोगों की मातृभाषा के साथ अन्याय नहीं होने देगी। भारतीय जनतंत्र मोर्चा की बैठक में केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा इस विषय के.संबंध में जल्द ही एक रुपरेखा तय की जायेगी। वर्ष 2000 की जनगणना के अनुसार भी बात करें तो मुंडारी भाषा 6 लाख 67 हजार लोग, कुड़माली 1 लाख 82 हजार, खड़िया 1 लाख 10 हजार, संथाली 20 लाख 75 हजार, हो 6 लाख 50 हजार, कुड़ुख 6 लाख 50 हजार, इसी तरह से ओड़िया और बांग्ला भाषा बोलने वालों की जनसंख्या भी करीब 5 से 6 लाख है। वहीं हम देखते हैं कि झारखंड में मगही 18 लाख 34 हजार, भोजपुरी 6 लाख 67 हजार लोग बोलते और समझते हैं। राकेश पाण्डेय ने कहा है कि आंकड़ों के अनुसार भी इन भाषाओं को बोलने वालों की संख्या बाकी कई भाषा बोलने वालो से अधिक है। फिर भी राज्य सरकार इनकी अनदेखी कर इस बात को प्रमाणित कर दिया है कि वह इन भाषाओं की विरोधी है। पांडे ने कहा कि राज्य सरकार यथाशीघ्र अपने निर्णयों पर विचार करते हुए मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषा को शामिल करे। अन्यथा भारतीय जनतंत्र मोर्चा इन भाषाओं को शामिल कराने के लिए सरकार पर लोकतांत्रिक तरीकों से दबाव बनायेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनतंत्र मोर्चा का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मिलकर अपना विरोध दर्ज करायेगा और मगही, भोजपुरी तथा अंगिका भाषा को भी इन प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल करने का आग्रह करेगा।






