
जमशेदपुर : झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने कहा है कि जमशेदपुर एवं इससे सटे सुवर्णरेखा-खरकई नदियों के समीपवर्ती शहरी इलाकों के बड़े भू-भाग में बरसात के समय बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर जा रहा है, जिस कारण से ये इलाके जलमग्न हो जा रहे हैं. मानगो नगर निगम, जमशेदपुर अक्षेस, जुगसलाई नगर परिषद, कपाली अक्षेस, आदित्यपुर नगर निगम एवं कतिपय ग्रामीण क्षेत्रों में बेतरतीब निर्माण और नदी तटों का अतिक्रमण होने से यह समस्या दिन-प्रतिदिन जटिल होती जा रही है. श्री राय ने कहा है कि इस विषय में विगत 16 अगस्त को उनकी पहल पर एक बैठक जमशेदपुर के स्वर्णरेखा परियोजना के अतिथिगृह में हुई थी, जिसमें स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के मुख्य अभियंता सहित कतिपय अन्य अभियंता तथा जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति के और मानगो नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उपस्थित थे. विचार-विमर्श के क्रम में निम्नलिखित बिन्दुओं की ओर स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के अभियंताओं ने ध्यान आकृष्ट कराया. श्री राय ने अपने पत्र में कहा है कि मुख्य सचिव के स्तर से एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाय, जिसमें जल संसाधन विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त, कोल्हान के आयुक्त, स्वर्णरेखा परियोजना के दोनों प्रमुख अभियंता, मानगो, जमशेदपुर, आदित्यपुर, जुगसलाई, कपाली नगर निकायों के विशेष कार्य पदाधिकारी एवं टाटा स्टील लिमिटेड और जुस्को के प्रतिनिधि भाग लें. नदी जल प्रबंधन एवं संरक्षण के लिए एक स्थायी समन्वय समिति का गठन किया जाय, ताकि समस्या का सुनियोजित तरीके से निदान हो सके. इसके लिए उपरोक्त सारे बिंदूओं से लोगों को अवगत कराया है. नीचे पढ़े बिंदू
- जमशेदपुर में मैरिन ड्राईव, टॉल ब्रिज एवं सोनारी-कांदरबेड़ा पुल का निर्माण होने के क्रम में नदी क्षेत्र का अतिक्रमण हुआ है. मानगो, कपाली, आदित्यपुर तथा जुगसलाई क्षेत्र के रिहायशी इलाकों में भी नदी के अतिक्रमण की प्रवृति बढ़ रही है, जिस कारण नदी की चौड़ाई दिन-प्रतिदिन सिमटते जा रही है.
- विगत 10-12 वर्षों से खरकई नदी के आदित्यपुर पुल के पास लगे ‘‘गेज स्टेशन’’ के आंकड़ों के अध्ययन से स्पष्ट है कि वर्ष 2008 में जितना पानी किसी खास स्तर पर नदी में बहता था, आज की तिथि में उसका 60 प्रतिशत ही पानी बह पा रहा है अर्थात आदित्यपुर पुल से मानगो पुल के बीच नदी का क्रॉस सेक्शन अतिक्रमण के कारण घटा है, जिसके कारण स्वर्णरेखा और खरकई नदियों की बहाव क्षमता कम हो गई है और पानी का ठहराव होकर बाढ़ की स्थिति बन रही है. जमशेदपुर और आदित्यपुर के फ्लॉ प्रोन एरिया में लगातार बढ़ रहे घरों की संख्या भी बाढ़ का एक कारण है.
- प्रथमदृष्टया सोनारी-कान्दरबेड़ा पुल के पास पुल द्वारा नदी का अतिक्रमण किया गया है. इसका अबेटमेंट नदी के भीतर है. एक किनारे पर मैरिन ड्राईव तथा दूसरे किनारे पर विभिन्न प्रकार के निर्माण होने के कारण उक्त स्थलों पर नदी के क्रॉस सेक्शन में कमी आई है, फलस्वरूप उसके ऊपर जल प्रवाह का आयतन कम रहने के बावजूद नदी जल प्रवाह की ऊंचाई बढ़ जा रही है.
- खरकई नदी पर बने आदित्यपुर टॉल ब्रिज तथा रेलवे ब्रिज के उपरी क्षेत्र में ठोस संरचनाओं के निर्माण से नदी की चौड़ाई कम हुई है, परिणामस्वरूप जयप्रकाश उद्यान एवं भाटिया बस्ती इलाकों में बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो रही है.
- विगत दस वर्षों में स्वर्णरेखा-खरकई के एक किनारे को मैरिन ड्राईव बनाकर अतिक्रमित करने और दूसरे किनारे पर बड़ी संख्या में स्ट्रक्चर का निर्माण होने के कारण नदी का क्रॉस सेक्शन संकुचित होते जाने के फलस्वरूप जानमाल के साथ-साथ काफी बड़ी राशि आपदा प्रबंधन के नाम पर भी खर्च करनी पड़ रही है. बाढ़ प्रबंधन एवं नियंत्रण से संबंधित विभिन्न उपक्रमों, निकायों एवं सरकार के विभागों में आपसी तालमेल नहीं रहने के कारण बाढ़ का सफल प्रबंधन एवं नियंत्रण नहीं हो पा रहा है.
- नदी पर बने शहरी नालों के स्लुईस गेटों के मुहाने पर जमा हो जा रहे कचरा के निस्तार के लिए भी समुचित प्रबंधन करने एवं इसके लिए ठोस योजना बनाने की आवश्यकता है क्योंकि शहरी क्षेत्र के नालों से बहने वाले प्लास्टिक एवं कचरा के कारण स्लुईस गेट बन्द नहीं हो पाते हैं और नदी का पानी नालों के माध्यम से उल्टी दिशा पकड़कर शहर के निचले इलाके में पसरने लगता है.
- औद्योगिक कचरा तथा घरेलू सिवरेज को सीधे नदी में डालने और औद्योगिक क्षेत्रों के ठोस अपशिष्टों को नालों के द्वारा नदी में प्रवाहित करने के कारण नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है और पेयजल संरचनाओं की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.
- मानगो एवं आदित्यपुर इलाकों में कई आवासीय एवं व्यवसायिक परिसर विकसित हो रहे हैं, जिनका नक्शा शहरी निकायों द्वारा नदी पर पड़ सकने वाले इसके प्रभाव का अध्ययन किए बगैर निर्गत किये जाते हैं, जिससे कई विसंगतियां उत्पन्न हो रही हैं इसलिए जरूरत है कि इस समस्या से संबंधित सरकार के सभी विभाग एवं संस्थान समस्या के नियंत्रण एवं समाधान हेतु साझा निर्णय लें. इसके लिए सरकार के स्तर से समन्वय बनाने की आवश्यकता है.
- मानगो पुल से आदित्यपुर टॉल ब्रिज के बीच टुकड़ों-टुकड़ों में जुस्को, नगर निकायों तथा सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना द्वारा तटबन्ध सुरक्षात्मक कार्य एवं स्लुईस गेट का निर्माण कराया जा रहा है. सम्पूर्ण क्षेत्र की एक समग्र योजना तैयार करने की जरूरत है, जिसमें अतिक्रमण मुक्त फ्लड मैपिंग एरिया तथा उक्त क्षेत्र में बनने वाले भवनों की स्वीकृति शर्तों के निर्धारण में नदी संरक्षण का दृष्टिकोण भी शामिल किया जाय तथा जो सिस्टम बने उसके संचालन संबंधित गाइडलाईन का निर्धारण किया जाय एवं अनुपालन भी सुनिश्चित किया जाय.
- पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा मानगो जलापूर्ति परियोजना के लिए बनाये गये इंटेक वेल के पास प्रति वर्ष बालू का जमाव क्षेत्र होने से उसका इनफ्लो प्रभावित होता है, इसलिए उनके इंटेक वेल के डिजाइन में भी जल संसाधन विभाग के वेटिंग की आवश्यकता है, ताकि सैंड डिफ्लेक्टर इत्यादि का प्रावधान हो सके.
- मोहरदा जलापूर्ति परियोजना के लिए निर्मित वियर एवं मानगो पुल के नीचे जमशेदपुर एवं मानगो की ओर से स्वर्णरेखा में मिलने वाले नालों की टेªनिंग आवश्यक है. इसी प्रकार नदियों से विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए जलापूर्ति हेतु किये गये निर्माणों की समीक्षा भी जरूरी हैं.
- नदी पर बननेवाले ग्रामीण विकास विभाग के पुल भी नदी को संकुचित कर रहे हैं. उनका एबटमेंट नदी भाग में ही रहता है, साथ ही उनके पिलर्स का डिजाइन उपयुक्त नहीं रहने से भी जलमार्ग अवरूद्ध होता है. इन मामलों में जल संसाधन विभाग से एनओसी लिया जाना अनिवार्य होना चाहिए. यदि समय रहते इन बढ़ रही समस्याओं पर सरकार गम्भीर नहीं होती है तो आनेवाले पांच वर्षों में स्थिति भयावह हो सकती है.







