जमशेदपुर : जमशेदपुर के एनटीटीएफ आरडीटाटा टेक्निकल सेंटर गोलमुरी के प्रबंधन प्रशासक अधिकारी वरुण कुमार ने नशे के खिलाफ चिंता जताई है. उनका कहना है कि नशा के विरुद्ध एक सामाजिक बुद्ध जरूरी है. यह नशारूपी कलंक पूरे समाज और राष्ट्र के लिए खतरा बना हुआ है. नशे का यह विनाशक तत्व किस तरह से हमारी सामाजिक जड़ों तक पहुंच रहा है, उसकी कुछ बानगी देखिए- हाल ही में एक पिता नशे की हालत में अपने आठ साल के बच्चे की छाती पर बैठ गया और इतना टार्चर किया कि बच्चे का दम निकल गया. मेरठ में मुस्कान ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की बर्बरता से हत्या कर दी, पता चला कि दोनों ने हत्याकांड को अंजाम देने से पहले नशे का सेवन किया था. देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसी घटनाएं रोज घटित हो रही हैं. तब अहसास होता है कि आजादी के 77 वर्ष पूरे होने की बाद आज जिस विकसित राष्ट्र की संकल्पना को लेकर इस देश का युवा जिसको देश के स्वर्णिम कल का वह प्रहरी माना जा रहा है, जिसके बूते भारत विश्व गुरु बनने का सपना पूरा करेगा और यह सच भी है कि विश्व गुरु बनाने में युवाओं का ही विशेष महत्व और भूमिका है. किंतु, आज देश का युवा नशे की गिरफ्त में चला जा रहा है और समाज इसकी चिंता करने के बजाय लगातार इसकी अनदेखी कर रहा है. एक समय था कि जब पड़ोसी को भी यह चिंता रहती थी कि हमारे पड़ोसी का बालक किसी गलत संगत में ना पड़ जाए, परंतु जब से मानवीय व्यवहार में परिवर्तन आया और लोग केवल हम और हमारे दो की भावना और स्वार्थ में डूब गए, तब से ऐसा ग्राफ गिरा है कि आज पूरा समाज ऐसी अवधारणा का शिकार है जहां केवल अपने व्यक्तिगत स्वार्थ और अति अवसरवादी सोच से पीड़ित है, जो पूरे राष्ट्र को बीमारू बना देगी. आंकड़ों के दृष्टिकोण से बात की जाए तो अलग-अलग प्रदेशों में नशे की चंगुल में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल, पंजाब, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, हरियाणा, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश युवा किसी न किसी प्रकार के नशे के चंगुल में फंस कर जीवन बर्बाद कर चुके हैं. (नीचे भी पढ़ें)
सवाल यह है कि यह इस स्तर तक कैसे पनप रहा है. नशा न केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या वरन एक ऐसी राष्ट्रीय समस्या है, जिसका निवारण करने हेतु हर उस व्यक्ति को आगे आना होगा, जो स्वयं को इस देश का नागरिक समझता है उसको अपनी प्राथमिकता में इसका निवारक सदस्य बनना होगा. हजारों लोग नशे की लत के कारण, न मिल पाने की स्थिति में आत्महत्या से लेकर परिजनों की हत्या तक कर चुके हैं. नशे के पैसे ना मिलने पर आत्महत्या जैसे मामलों की बड़ी संख्या है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2021 में 75000 से अधिक मामले दर्ज किए. हर साल 9000 लोग नशे के कारण आत्त्महत्या करते हैं. पंजाब, हरियाणा जैसे राज्य में हर वर्ष 15 प्रतिशत वृद्धि हो रही है. देश के अंदर और बाहरी सीमाओं की नाकेबंदी और कठोर नियम बनाने के कड़े निर्देश दिए हैं. नशा केवल एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं यह पूरे समाज और राष्ट्र के लिए खतरा है. नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल कानून लागू करना है पर्याप्त नहीं है. इसे रोकने के लिए एक ऐसे जागरूकता अभियान की, पारिवारिक सहयोग, युवाओं से संवाद, स्कूल एवं कॉलेज में अध्यापकों को प्रहरी की भूमिका निभाते हुए आगे आना लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति. युवा वर्ग को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना. नशा मुक्त समाज का निर्माण करना, जहां हर व्यक्ति स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सके. टेलीविजन, रेडियो और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म पर नशा मुक्ति अभियान के संदेश प्रसारित किए जाते हैं. नशा मुक्ति अभियान के चलते समाज में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं. नशे के दुष्परिणामों को समझने के बाद, कई लोगों ने इसे छोड़ने का निर्णय लिया है. (नीचे भी पढ़ें)
नशा मुक्त जीवन जीने के लिए परिवार और दोस्तों का सहयोग सबसे अधिक महत्वपूर्ण है. यदि समाज भी इस समस्या के खिलाफ एकजुट हो जाए, तो नशे पर काबू पाया जा सकता है. एक नशा मुक्त समाज न केवल स्वस्थ बल्कि सशक्त भी होता है. नशा मुक्ति में परिवार और दोस्तों का सहयोग अत्यधिक महत्वपूर्ण है. एक सकारात्मक और सहायक वातावरण व्यक्ति को नशे की लत से बाहर निकालने में मदद करता है. नशा मुक्त समाज का महत्व एक नशा मुक्त समाज स्वस्थ, सशक्त और प्रगतिशील होता है. नशा मुक्ति केंद्र ऐसे संस्थान हैं, जो नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों को सही उपचार और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं. ये केंद्र शारीरिक, मानसिक, और सामाजिक पुनर्वास की प्रक्रिया में मदद करते हैं. मानसिक और भावनात्मक समस्याओं को हल करने के लिए व्यक्तिगत और समूह परामर्श दिया जाता है. नशा छोड़ने के बाद उत्पन्न होने वाले तनाव और अवसाद से निपटने में मदद. व्यक्ति को समाज में पुनः स्थापित करने में मदद करते हैं. जीवन कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
योग और ध्यान –मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए योग और ध्यान की गतिविधियां : यह इसलिए भी जरूरी है कि आज देश के अंदर ही नहीं, देश की बाहरी ताकतें हमारे इस युवा राष्ट्र को उसकी ऊर्जा को खत्म करने का ऐसा षड्यंत्र रच रही है, जिससे राष्ट्रीय जो वैश्विक स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसे रोकने की कोशिश कर रही हैं.











