
जमशेदपुर : अंधापन निवारण अभियान, जिसके तहत मुख्य रूप से मोतियाबिन्द निवारण कर लेंस प्रत्यारोपण किया जाता है और इसमें मुख्य रूप से लाभुक बुजूर्ग होते हैं, लेकिन अपवाद स्वरूप कुछ ऐसे मामले भी आ जाते हैं, जिसे देकर ह्रदय करुणा से भर जाता है और संवेदनशील ह्रदय यह प्रयास करता है कि किसी भी प्रकार से उसकी तकलीफ को दूर किया जाए. ऐसा ही मामला पिछले दिनों 29 जनवरी को बागबेड़ा थाना चौक स्थित रेड क्रॉस, राम मनोहर लोहिया नेत्रालय द्वारा आयोजित नेत्र शिविर के जांच सत्र में देखने को मिला, जब एक डेढ़ साल के बच्चे नवीन मुखी की आंख में मोतियाबिन्द पाया गया. इसके कारण वह बच्चा बहुत ही असहज था. उसके माता-पिता बाहामनी मुखी-जितेन मुखी इतने परेशान थे कि इस छोटे से बच्चे को लेकर उन्होंने आसपास के लगभग सभी आंख के अस्पतालों के चक्कर लगा चुके थे और उन्हें निराशा ही हाथ लगी। (नीचे भी पढ़ें)

रेड क्रॉस सोसाइटी के लिए भी कैम्प में यह ऑपरेशन मुश्किल था, क्योंकि डेढ़ साल के बच्चे का ऑपरेशन बिना एनेस्थेटिक (निश्चेतक विशेषज्ञ) के सम्भव नहीं था. रेड क्रॉस सोसाइटी, पूर्वी सिंहभूम के मानद सचिव विजय कुमार सिंह तथा वरीय नेत्र चिकित्सक डॉ बीपी सिंह बच्चे की पीड़ा को सहन नहीं कर सके, उन्होंने बच्चे के ऑपरेशन की ठानी और इसके लिए रेड क्रॉस सोसाइटी की मदद को हमेशा तैयार रहने वाले एनेस्थेटिक व टाटा मोटर्स हॉस्पिटल के वरीय चिकित्सक डॉ अशोक जाडोन से सम्पर्क किया, जिन्होंने इस ऑपरेशन में अपने सहयोग की सहमति दी. बुधवार को शंकर चक्षु चिकित्सालय में नेत्र चिकित्सक डॉ बीपी सिंह के द्वारा यह ऑपरेशन सम्पन्न हुआ, जहां डॉ जाडोन ने अपनी भूमिका निभायी. इस दौरान रेड क्रॉस सोसाइटी, पूर्वी सिंहभूम के मानद सचिव विजय कुमार सिंह तथा रेड क्रॉस के कार्यकर्ता उपस्थित थे.





