
चाकुलिया : विश्व पर्यावरण दिवस पर पद्मश्री जमुना टुडू से बात करने पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण करने के लिए लोगों को संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए आज सभी को जंगल संरक्षण का संकल्प लेने की जरूरत है. जंगल संरक्षण से ही उन्हें एक अलग पहचान मिली है. उन्होंने कहा कि कोरोना काल ने लोगों की आंखें खोल दी है कि जीवन में पर्यावरण का क्या महत्व है. कहा कि आज ऑक्सीजन की कमी से लोगों की मौत हो रही है. पृथ्वी पर ऑक्सीजन की कमी ना हो इसके लिए हर व्यक्ति कम से कम पांच पौधा लगायें,तभी पर्यावरण संतुलन बना रहेगा. पेड़ है तो जीवन है. पेड़ की महत्व को समझने की जरूरत है. श्रीमती टुडू ने कहा कि पर्यावरण दिवस मात्र मानने से ही हमारा उद्देश्य और कर्तव्य समाप्त नही होता है. सही मायने में पर्यावरण दिवस तभी सफल होगा जब हर व्यक्ति पर्यावरण के प्रति सचेत और सतर्क होकर जंगल में हो रही अवैध पेड़ -पौधे की कटाई के प्रति जागरूक होकर अभियान से जुड़कर पेड़ पौधे की सुरक्षा में जुटेंगे. श्रीमती टुडू ने कहा कि उन्होंने जंगल संरक्षण करने का कार्य वे अपनी छोटी सी गांव बेड़ाडीह गांव से की थी. गांव की कुछ महिलाओं के साथ मिलकर गांव से सटे साल जंगल में पहरेदारी कर जंगल संरक्षण करने का काम शुरू की थी. कहा कि अभियान से जुड़ी महिलायें बारी बारी से जंगल में पहरेदारी कर जंगल की सुरक्षा करती है. महिलाएं जंगल की पेड़ को पेड़ समझ कर नही बल्कि पेड़ को भाई मानकर पेड़ की सुरक्षा करती है. वन सुरक्षा समिति की महिलाएं हर पर्यावरण दिवस और रक्षाबंधन पर जंगल जाकर पूरी रीति-रिवाज के साथ जंगल जाकर पेड़ पर राखी बांधकर जंगल की सुरक्षा करने की संकल्प लेती है. श्रीमती टुडू ने कहा कि आज उनके नेतृत्व में प्रखंड के हर गांव में वन सुरक्षा समिति का गठन किया गया है. इसमें महिलायें अभियान से जुड़कर वन की सुरक्षा कार्य करती है. उन्होंने कहा कि शुरूआती दौर में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा परंतु वन विभाग के पदाधिकारियों के साथ मिलने और गांव के लोगों का सहयोग मिलने से उन्होंने जंगल संरक्षण करने की कार्य से हार नही मानी और आगे धीरे धीरे अन्य गांवों में भी समिति का गठन कर महिलाओं को इस अभियान से जोड़ा है.कहा कि जंगल संरक्षण करने की इस मुहिम ने उनको एक अलग पहचान दी है. आज क्षेत्र में जमुना टुडु को लोग लेडी टार्जन के नाम से भी जानते हैं.





