चाकुलिया : चाकुलिया प्रखंड मुख्यालय से महज 6-7 किमी की दुरी पर बदहाल शिक्षा व्यवस्था देखनी हो तो कुचियाशोली पंचायत के बालिबांध पीएम श्री उत्क्रमित उच्च विद्यालय में जाएं. जहां ग्रामीण छात्र- छात्राएं समस्याओं की मकड़जाल में भी घीर कर ले रहें हैं शिक्षा. विद्यालय को तो पीएम श्री का दर्जा दी गई है परंतु सुविधा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है. विद्यालय में कक्षा 1- 10 वीं तक की पढ़ाई होती है और विद्यालय में कुल 400 विद्यार्थी नामांकित है. विद्यालय 10 शिक्षकों के भरोसे संचालित है. विद्यालय की रसोई घर भी विगत एक माह पूर्व ध्वस्त हो गया है जिसकारण विद्यालय की रसोईया फिलहाल एक कमरें में बच्चों के लिए भोजन बनाती है. (नीचे भी पढ़ें)
जर्जर कुंआ के गंदे पानी से बनता है भोजन और बच्चें पीते है पानी : विद्यालय के छात्र छात्राओं ने बताया कि विद्यालय में उनके समक्ष पेयजल की घोर समस्या व्याप्त है. विद्यालय परिसर स्थित कुंआ काफी जर्जर हो चुका है और कुंआ का पानी भी गंदा है. विकल्प के रूप में समरसेबुल है परंतु उससे भी पानी गंदा आता है और पानी में बालू आता है जिसकारण सभी बच्चें मजबुरन कुंआ के गंदे पानी पीने के लिए मजबुर है. विद्यार्थियों ने कहा कि विद्यालय के छत पर लगें टंकी के पानी भी गंदा है. टंकी की साफ-सफाई भी नहीं किया जाता है, जिस कारण टंकी का पानी भी गंदा है. टंकी का ढक्कन भी नहीं है, जिसकारण हमेशा टंकी खुला ही रहता है और टंकी में पत्ता और धुल भी जमा है. (नीचे भी पढ़ें)

शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थी कुछ विषय की पढ़ाई खुद ही करते हैं : विद्यालय के 10वीं के विद्यार्थियों ने कहा कि विद्यालय में विषयवार शिक्षक नहीं है. शिक्षकों की कमी के कारण वे सभी खुद ही कक्षा में बैठकर पढ़ाई करते हैं. कुछ विषय के शिक्षक तो है परंतु वे रोजाना विद्यालय में पढ़ाने नहीं आते हैं. विद्यार्थियों ने कहा कि विद्यालय की स्थिति को देखने वाला कोई नहीं है. ना तो कोई जन प्रतिनिधि विद्यालय का निरीक्षण करने कभी आते है और ना ही कोई पदाधिकारी वे अपनी समस्याओं को किसके समक्ष रखें. (नीचे भी पढ़ें)

विद्यार्थियों ने सरकार से मांग किया है कि विद्यालय परिसर की साफ सफाई कराई जाए और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाएं ताकी वे सभी स्वस्थ्य रह सकें. विद्यार्थियों ने सरकार से विद्यालय में शिक्षकों की मांग की है ताकि विद्यालय में सही ढंग से पठन पाठन हो सके और वे सभी बेहतर शिक्षा ग्रहण कर सकें. वहीं चहारदीवारी नहीं होने के कारण भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.




