गालूडीह : उल्दा में चल रहे शिव पुराण कथा के छठे दिन स्वामी हृदयानंद ने बताया कि एक बार शिवजी के गण नंदी ने देवी पार्वती की आज्ञा पालन में त्रुटि कर दी थी. इससे नाराज देवी ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक का निर्माण कर उसमें प्राण डाल दिये और कहा कि तुम मेरे पुत्र हो. तुम मेरी ही आज्ञा का पालन करना किसी और की नहीं. देवी पार्वती ने यह भी कहा कि मैं स्नान के लिए जा रही हूं, ध्यान रखना कोई भी अंदर न आने पाये.(नीचे भी पढ़ें)

थोड़ी देर बाद वहां भगवान शंकर आए और देवी पार्वती के भवन में जाने लगे. यह देखकर उस बालक ने विनयपूर्वक उन्हें रोकने का प्रयास किया. बालक का हठ देखकर भगवान शंकर क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से उस बालक का सिर काट डाला. देवी पार्वती ने जब यह देखा तो वे बहुत क्रोधित हुईं. उनकी क्रोधाग्नि से सृष्टि में हाहाकार मच गया. तब सभी देवताओं ने मिलकर उनकी स्तुति की और बालक को पुनर्जीवित करने के लिए कहा. (नीचे भी पढ़ें)

इसके बाद भगवान शिव के कहने पर भगवान शंकर के कहने पर विष्णुजी एक हाथी का सिर काटकर लाए और वह सिर उन्होंने उस बालक के धड़ पर रखकर उसे जीवित कर दिया. तब भगवान शंकर व अन्य देवताओं ने उस गजमुख बालक को अनेक आशीर्वाद दिये. देवताओं ने गणेश, गणपति, विनायक, विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य आदि कई नामों से उस बालक की स्तुति की. इस दौरान श्रद्धालु गणपति बप्पा मोरिया के नारे लगा रहे थे.(नीचे भी पढ़ें)
भव्य गंगा आरती हुई आयोजित
कथा के अंत में भव्य गंगा आरती का आयोजन हुआ. हजारों श्रद्धालु ने गंगा आरती में शामिल हुए। बनारस की गंगा आरती की तरह यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे. चारों तरफ अंधेरे को चीरती हुई दीये की रोशनी जगामगाने जा रही थी। नजारा बनारस की तरह ही दिख रहा था. पवित्र मंत्रोच्चारण से वातावरण शुद्ध हो रहा था. जगमग दीए इसकी खुबसूरती में चार चांद लगा रहे थे.




