राजन सिंह की रिपोर्ट
डुमरिया : झारखंड सरकार ने स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था करा दी है. लेकिन कई गांवों में नेवर्क तक नहीं है. जमशेदपुर के ग्रामीण इलाके नक्सल प्रभावित डुमरिया प्रखंड है. डुमरिया प्रखंड की केंदुआ पंचायत के सुदूर और पहाड़ी गांव रांगामाटिया-फॉरेस्ट ब्लॉक और दम्पाबेडा के प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चें लॉकडाउन में स्कूल बंद होने के कारण शिक्षा प्रभावित हो रहा है. सरकार ने बच्चों को शिक्षा देने के लिए मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करायी है. गांव में मोबाइल नेटवर्क नही होने के कारण बच्चे गांव में आनलाइन शिक्षा प्राप्त नही कर पा रहे हैं. जिस कारण गांव के छात्र-छात्राएं मनीषा देवगम, डेलेक्यू देवगम, सरीता हांसदा, दुखीराम सोरेन समेत 10 से 15 बच्चे ऑनलाइन क्लास करने के लिये 3 हजार फीट पहाड़ की चोटी पर चढ़ते है.

बच्चों को पहाड़ की चोटी पर चढ़ने का कारण यह है कि गांव में मोबाइल का नेटवर्क नही रहता है. दम्पाबेडा गांव के आस-पास दर्जनों गांव में मोबाइल का नेटवर्क नही है. इन दिनो लॉकडाउन में सभी स्कूल के शिक्षकों ने बच्चों की पढाई के लिये ऑनलाइन पढाई शुरू की है. बच्चों के पिता के मोबाइल पर पढाई के लिये प्रति दिन लिंक भेजा जा रहा है. साथ ही कहा जाता है कि दस बजे से 11 बजे तक पढाई होगी. इस दौरान बच्चों को ऑनलाइन रहना है. पिता के मोबाइल पर पढाई के लिये लिंक भेजे जाने पर बच्चे भी पढ़ाई के लिये अपने पिता को तंग करते है, जिसके कारण पिता को मोबाइल नेटवर्क के लिये जंगल पहाड़ों पर नेटवर्क की खोज करनी पड़ती है. इसी तरह दम्पाबेडा गांव के रहने वाले वीरसिंह देवगम अपनी पुत्री को पढ़ाने के लिये मोबाईल नेटवर्क के लिये 3000 फीट दम्पाबेडा पहाड़ की चोटी पर चढ़ते है. वीरसिंह देवगम अपने बच्चे के साथ साथ गांव के अन्य बच्चें भी ऑन लाइन पढ़ने के लिये पहाड़ की चोटी पर चढ़ते है.

ऐसा इसलिये है कि गांव में मात्र बिरसिंह देवगम के पास ही एंड्राईड फोन है .गांव में एक फोन होने के कारण गांव के सभी बच्चें एक साथ स्कूल ड्रेस में ही पहाड पर चढ़ते है और ऑनलाइन पढाई करते है. वीरसिंह देवगम सामाजिक कार्यकर्ता भी है, जिससे उसने लॉकडाउन में अपने बच्चों के साथ-साथ गांव के बच्चों को भी पढ़ाने का जिम्मा लिया और प्रतिदिन वे समय अनुसार बच्चों को लेकर पहाड़ की चोटी पर जाते है और स्कूल के मास्टर द्वारा दिया गया लिंक पर ऑनलाइन होकर बच्चों को पढ़ाते है. वीरसिंह देवगम ने कहा कि गांव समेत आसपास दर्जनों गांव में मोबाइल नेटवर्क नही है. पहाड़ की चोटी पर जाने पर ही मोबाइल का नेटवर्क मिलता है. गांव में अगर किसी को बात करनी होती है तो वे पहाड़ की चोटी पर जाकर ही बात करते है. सरकार अगर रांगामाटिया गांव में मोबाइल का टॉवर लगा दे तो समस्या का समाधान हो सकता है, लेकिन इस ओर अब तक किसी ने ध्यान नही दिया है. लेकिन इस जज्बे को हर कोई सलाम जरूर कर रहा है. वीरसिंह जैसे लोगों के जज्बे के कारण ही 15 बच्चे पढ़ाई कर पा रहे है.















